सकल नामांकन अनुपात लक्ष्य को पूरा करने में मुक्त विश्वविद्यालय अहम

प्रयागराज, 5 मई, 2026। उ.प्र. राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज में स्नातक रोजगारपरकता में वृद्धि विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन कौशल आधारित कई कार्यक्रमों को विकसित करने की रूपरेखा तय की गई। यूपीआरटीओयू और राष्ट्रमंडल शैक्षिक मीडिया केंद्र एशिया, नई दिल्ली द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह कार्यशाला 4 से 6 मई, 2026 तक चल रही है, जिसमें विश्वविद्यालय के प्रत्येक विद्या शाखा के शिक्षक सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
कार्यशाला के दूसरे दिन मंगलवार को फेसिलिटेटर डॉ. प्रदीप कुमार चौधरी, सलाहकार सी ओ एल सेमका ने रेखांकित किया कि स्नातक रोजगारपरकता को राष्ट्रीय नीति और बाजार बदलावों के आलोक में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कार्यशाला के उद्देश्यों को सीधे एन ई पी 2020 से जोड़ा, जिसका लक्ष्य 2035 तक उच्च शिक्षा में 50% सकल नामांकन अनुपात प्राप्त करना और कक्षा 6 से ही व्यावसायिक शिक्षा को एकीकृत करना है। डॉ. चौधरी ने कहा कि लचीली, कौशल-आधारित डिग्रियां देकर इस सकल नामांकन अनुपात लक्ष्य को पूरा करने में मुक्त विश्वविद्यालयों की अहम भूमिका है।
उन्होंने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना
की चर्चा करते हुए कहा कि 2015 में शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत देशभर में 1.6 करोड़ से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिनमें से 1.1 करोड़ से अधिक को प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 के मांग-आधारित मॉडल के तहत प्रमाणित किया गया है। भविष्य के रोजगार बाजारों पर बात करते हुए डॉ. चौधरी ने गिग वॉर के लिए तैयार रहने पर जोर दिया। नीति आयोग की 2022 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि भारत का गिग कार्यबल 2020-21 में 77 लाख से बढ़कर 2029-30 तक 2.35 करोड़ होने का अनुमान है। स्नातकों को केवल नौकरियों के लिए नहीं, बल्कि फ्रीलांसिंग, प्लेटफॉर्म वर्क और सूक्ष्म उद्यमिता के लिए भी प्रशिक्षित करना होगा। उन्होंने समझाया कि पाठ्यक्रमों में डोमेन ज्ञान के साथ डिजिटल, वित्तीय और संचार कौशल भी विकसित करने होंगे । उन्होंने भारत सरकार और उ.प्र. सरकार की प्रमुख पहलों डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, मिशन रोजगार और एक जिला एक उत्पाद को भी रेखांकित किया, जिन्हें विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम डिजाइन में शामिल करना चाहिए। ओडीओपी ने अकेले 1.6 लाख करोड़ रुपये का निर्यात किया है और उ.प्र. में 25 लाख कारीगरों को सहारा दिया है।
संस्थागत प्रतिबद्धता पर बोलते हुए आयोजन सचिव डॉ. गौरव संकल्प ने बताया कि कुलपति प्रो. सत्यकाम ने सभी विद्या शाखाओं को नए रोजगारपरक और कौशल-आधारित कार्यक्रम विकसित करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। कुलपति चाहते हैं कि यूपीआरटीओयू डिग्री देने से आगे बढ़कर कौशल देने वाला विश्वविद्यालय बने। डॉ. संकल्प ने कहा कि अब हर नए पाठ्यक्रम प्रस्ताव में बाजार का अध्ययन, उद्योग की प्रतिक्रिया और स्पष्ट जॉब रोल शामिल करना होगा। संयोजक डॉ. त्रिविक्रम तिवारी ने तकनीकी सत्रों का समन्वय करते हुए कहा कि शिक्षक समूह हैंड्स-ऑन अभ्यासों में लगे हैं। जिनमें नेशनल करियर सर्विस पोर्टल से जॉब रोल की पहचान करना, क्यू पी एन ओ एस को पाठ्यक्रम परिणामों से मैप करना और लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन, डिजिटल मार्केटिंग व स्वास्थ्य सहायक जैसे क्षेत्रों में 30-घंटे के माइक्रो-क्रेडेंशियल का मसौदा तैयार करना प्रमुख है। कार्यशाला का समापन 6 मई को होगा।
