साहित्य और इतिहास का अंतर्संबंध ‘ विषय पर विशेष व्याख्यान का हुआ आयोजन

प्रयागराज हिन्दी दिवस एवं राजभाषा पखवाड़ा के अवसर पर हिंदी विभाग तथा मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग, इलाहाबाद डिग्री कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में ‘साहित्य और इतिहास का अंतर्संबंध ‘ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। अतिथि वक्ता साहित्य एवं इतिहास के युवा अध्येता, जानेमाने आलोचक क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर के इतिहास विभाग में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ. रमा शंकर सिंह थे। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि इतिहास और साहित्य का संबंध अन्योन्याश्रित है। साहित्य इतिहास लेखन को प्रभावित करता है। अवश्वघोष ने बुद्धचरित की रचना की जिसका प्रभाव न सिर्फ़ इतिहास पर बल्कि स्थापत्य, चित्रकारी और मूर्तिकला पर भी पड़ा। राजा महाराजाओं का जीवन चरित पौराणिक चरित्रों के आधार पर गढ़ा गया।
इतिहासकार जब जब फंसता है तो साहित्य से दृष्टि पाता है। आर्काइव तथ्यों का ज़ख़ीरा हैं लेकिन साहित्य में मनुष्य के भाव और संवेदना की अभिव्यक्ति होती है, इसलिए समाज के भावों के अध्ययन के लिए हमें साहित्य के पास जाना पड़ता है। महात्मा गांधी के जीवन के अंत का जैसा मार्मिक चित्रण मैला आँचल करता है, जैसा वर्णन टोपी शुक्ला में मिलता है, वह इतिहास में नहीं मिलता।
प्रो. नीना शुक्ला ने अपने वक्तव्य में इतिहास और साहित्य के संबंध पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हिन्दी विभाग के समन्वयक प्रो संजय सिंह ने अपने व्याख्यान में कहा कि इतिहास का गंभीर अध्येता बने बिना साहित्य का गंभीर पाठक बनना मुश्किल है! साहित्य को समझने के लिए इतिहास का गंभीर अध्ययन आवश्यक है। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. बृजेश कुमार यादव ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. हरेंद्र नारायण सिंह ने किया। कार्यक्रम में कुलानुशासक प्रो. मार्तंड सिंह का सान्निध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में प्रो. नंदिता, डॉ. अंजना पाठक, डॉ. विवेकानंद, डॉ, योगेश यादव, डॉ. ओम प्रकाश, श्री चंद्रशेखर मीणा के अतिरिक्त बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की रुचिगत उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया।
