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11वाँ आयुर्वेद दिवस सोल्लाश सम्पन्न आयुर्वेद भारतीय ज्ञान परम्परा की अमूल्य धरोहर – प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह

11वाँ आयुर्वेद दिवस सोल्लाश सम्पन्न

आयुर्वेद भारतीय ज्ञान परम्परा की अमूल्य धरोहर – प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह

स्वस्थ एवं सशक्त भारत की आधारशिला है आयुर्वेद – डॉ तोमर

विश्व आयुर्वेद मिशन, आरोग्य भारती एवं प्रवेक कल्प के संयुक्त तत्वावधान में 11वाँ आयुर्वेद दिवस होटल कान्हा श्याम प्रयागराज में पूर्ण हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गोविन्द बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान प्रयागराज के डायरेक्टर प्रो (डॉ) योगेन्द्र प्रताप सिंह रहे एवं अध्यक्षता विश्व आयुर्वेद मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं आरोग्य भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो(डॉ)जीएस तोमर ने की । इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय हण्डिया के प्राचार्य डॉ केदार नाथ, क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डॉ नवीन सोनी, मेडिकल कॉलेज की पूर्व शोध अधिकारी डॉ शांति चौधरी एवं आरोग्य भारती काशी प्रांत के उपाध्यक्ष नागेंद्र जायसवाल उपस्थित रहे । कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रवेक कल्प के चिकित्सक डॉ शिवम् महेश्वरी ने अतिथियों का स्वागत किया एवं प्रवेक के उत्पादों का विस्तृत परिचय कराया । उसके बाद विषय प्रवर्तन करते हुए डॉ जी एस तोमर ने “स्वस्थ कल के लिए आयुर्वेद” विषय की पृष्ठभूमि एवं औचित्य पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए आयुर्वेदीय स्वस्थ जीवनशैली की जानकारी दी । डॉ तोमर ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन का ध्यान संक्रामक रोगों से हटकर जीवनशैली जन्य रोगों की ओर आकृष्ट हुआ है । आयुर्वेद इन रोगों की सफल चिकित्सा करने में सक्षम है । उन्होंने कहा कि औषधियों की गुणवत्ता चिकित्सा की सफलता का मूल मंत्र है । प्रवेक कल्प गुणवत्ता का पर्याय है । नर्वोकल्प को जीर्ण एवं दुश्चिकित्स्य रोगों की संजीवनी बताते हुए उन्होंने प्रवेकलिव को लिवर रोगों में, रुमाकल्प को गठिया में, नेत्रामृत को रेटिनोपैथी में कारगर बताते हुए अपने अनुभव साझा किए । मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्बोधन में डॉ वाई पी सिंह ने बताया कि एआई के बढ़ते प्रभाव के साथ-साथ आयुर्वेद चिकित्सकों को भी नवाचार अपनाना होगा । अन्यथा भविष्य में क्वांटम कम्प्यूटर के आने पर अनेक कठिनाइयों का सामना करना होगा । आयुर्वेद को भारतीय ज्ञान परम्परा की अमूल्य धरोहर बताते हुए उन्होंने इसकी औषधियों को निरापद एवं अमृतवत फलदायी बताते हुए प्रवेक कल्प की औषधियों की गुणवत्ता की प्रशंसा की । डॉ केदार नाथ ने स्वर्ण प्राशन को नौनिहालों के स्वास्थ्य के लिए वरदान बताया । डॉ नवीन सोनी ने रोगियों के प्रति मित्रता व करुणा का भाव एवं अपने शास्त्र में विश्वास को वैद्यों की मूल आवश्यकता बताया । डॉ शांती चौधरी ने गर्भ संस्कार से सुसंस्कृत संतति की आवश्यकता पर बल दिया वहीं नागेन्द्र जायसवाल ने आरोग्य भारती के विविध प्रकल्पों की जानकारी साझा की । इस अवसर पर डॉ एसके राय ने भी अपने विचार व्यक्त किए । समारोह में डॉ वीएन त्रिपाठी, डॉ बीएस रघुवंशी, डॉ आशुतोष मालवीय, डॉ एके त्रिपाठी, डॉ डीके श्रीवास्तव, डॉ ब्रह्मानंद द्विवेदी, डॉ अरविंद मिश्रा, डॉ सपना मिश्रा, डॉ सुभाष राय, डॉ राकेश सिंह, डॉ सुरेश उपाध्याय, डॉ भरत नायक, डॉ अजय मिश्रा, डॉ सुधीर सिंह, डॉ एम डी दुबे, डॉ आशीष मौर्य, राजेन्द्र कुमार सिंह, अनुराग अष्ठाना, अखिलेन्द्र सिंह, अंकुश सिंह एवं राम सिंह सहित 130 चिकित्सकों ने प्रतिभाग किया । संचालन विश्व आयुर्वेद मिशन के सह सचिव डॉ अवनीश पाण्डेय ने किया । धन्यवाद ज्ञापन जेडएसएम जितेंद्र तिवारी ने किया ।

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