डीपीएसएएमयूएन 2026 का हशुभारंभ दिल्ली पब्लिक स्कूल, प्रयागराज में हुआ
450 से अधिक छात्र प्रतिनिधियों ने वैश्विक और राष्ट्रीय मुद्दों पर वाद-विवाद में भाग लिया।

प्रयागराज,दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), प्रयागराज ने दो दिवसीय मॉडल संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, डीपीएसएएमयूएन 2026 का उद्घाटन बड़े उत्साह और बौद्धिक उमंग के साथ किया। उद्घाटन समारोह में उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। सम्मेलन में प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और लखनऊ के विद्यालयों से 450 से अधिक छात्र प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
डीपीएसएएमयूएन 2026 छात्रों को समकालीन वैश्विक और राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करने, विविध दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान करने और रचनात्मक संवाद एवं कूटनीतिक सहभागिता के माध्यम से समाधान विकसित करने के लिए एक गतिशील मंच प्रदान करता है। सम्मेलन का उद्देश्य युवा शिक्षार्थियों में आलोचनात्मक सोच, अनुसंधान कौशल, नेतृत्व क्षमता, प्रभावी संचार और जिम्मेदार वैश्विक नागरिकता की भावना को बढ़ावा देना है।
इस सम्मेलन में 10 समितियाँ शामिल हैं, जो संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय मंचों के कामकाज का अनुकरण करती हैं। इनमें संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA), संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), आर्थिक एवं वित्तीय समिति (ECOFIN), अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA), अखिल भारतीय राजनीतिक दल सम्मेलन (AIPPM), ऐतिहासिक संकट समिति और अंतर्राष्ट्रीय प्रेस, साथ ही अन्य विशिष्ट समितियाँ शामिल हैं। प्रतिनिधि समकालीन महत्वपूर्ण मुद्दों पर संरचित बहस, नीतिगत चर्चा, वार्ता और राजनयिक विचार-विमर्श में भाग ले रहे हैं।
विभिन्न देशों और राजनीतिक दृष्टिकोणों का प्रतिनिधित्व करते हुए, युवा प्रतिनिधि अपनी शोध क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच, सार्वजनिक भाषण और वार्ता कौशल का प्रदर्शन कर रहे हैं। ये सत्र प्रतिभागियों को अलग-अलग विचारों का सम्मान करने, सार्थक संवाद में शामिल होने और सर्वसम्मति-आधारित समाधानों की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, साथ ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान करते हैं।
इस अवसर पर दिल्ली पब्लिक स्कूल, प्रयागराज की अध्यक्ष श्रीमती सोनू सिंह और प्रिंसिपल डॉ. सुजाता सिंह भी उपस्थित थीं। उन्होंने समग्र शिक्षा को बढ़ावा देने और छात्रों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता, नेतृत्व और बौद्धिक जिज्ञासा को पोषित करने में मॉडल संयुक्त राष्ट्र जैसे शैक्षणिक मंचों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिनिधियों को इस अवसर का भरपूर लाभ उठाने और विचारशील, जानकार और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रोत्साहित किया।

