अंकिता चतुर्वेदी के गायन ने संगम की रेती पर भक्ति रस की छोड़ी फुहार

डाक्टर अंकिता चतुर्वेदी ने यह प्रयाग है यहां धर्म की ध्वजा निकलती है, मृग नैनी को यार नवल रसिया तथा श्रोताओं की मांग पर भजन एवं सूफी गायन की प्रस्तुति के साथ NCZCC के संगम की रेती पर लगे विशाल पंडाल को मंत्र मुग्ध कर दिया।दर्शक लगातार वाह वाह करते रहे।
सांस्कृतिक महोत्सव की शाम पारंपरिक चकरी नृत्य, लोकगीत और भजनों की प्रस्तुति भी हुई। एनसीजेडसीसी द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रंखला में शास्त्रीय संगीत के नामवर बांसुरी वादक चेतन जोशी ने चलो मन गंगा यमुना तीर के मंच पर बासुरी वादन कर पंण्डाल में उपस्थित लोगों को भक्ति विभोर कर दिया। उनकी बांसुरी की मधुर तान से श्रोता मोहित हो उठे। जैसे-जैसे शाम ढलती गई सांस्कृतिक कार्यक्रम का कारवां बढ़ता गया। कार्यक्रम कि शुरूआत स्थानीय कलाकारों द्वारा गंगा की महिमा को बताते हुये बिरहा गायन से होती है। इसके बाद भोजपुरी गायक विकास मिश्रा एवं दल ने प्रयाग,संगम के लहरिया बड़ा नीक लागे, दुमका में झुमका हेरउली काशी में कनवाली एवं देशभक्ति गीत की प्रस्तुति देकर खूब तालिया बटोरी वहीं राम रथ पाण्डेय ने अवधी लोकगीत माडों की लडाई की प्रस्तुति दी। इसके बाद महेन्द्र एवं दल ने करम देवता तोहर नामे रहते हैं उपवास पर कर्मा नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर सबका मन मोह लिया। इसके बाद मैं कहूं हुकुम द वो गवरी पार्वती पर काठी लोकनृत्य की प्रस्तुति कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ढोल,चिमटा और घुंघुरू की छम छम आवाज पर सिक्किम का सिंधीछम नृत्य दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। शिव नारायण एवं दल ने चकरी लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। वही छवि लाल प्रधान ने सिक्किम का सिंधीछम नृत्य पेश कर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। त्रिपुरा से पधारे कल्याणी मोग ने संगराई नृत्य की प्रस्तुति दी। पद्मा बाई, शिवराज, जनता बाई, चंन्र् भान आदि लोगों ने संगत कलाकारों में साथ दिया। कार्यक्रम का संचालन रेनू राज सिंह ने किया।
