श्री अन्न में छिपा है पोषण का खजाना – प्रो.(डॉ.) जी एस तोमर

अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स इयर के चलते पूरे विश्व में श्री अन्न के प्रति किसानों और आम नागरिकों में जागरूकता पैदा की जा रही है।
इसी कड़ी मे गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान प्रयागराज एवं विश्व आयुर्वेद मिशन के संयुक्त तत्वावधान मे “श्री अन्न एवं सुपोषण” विषय पर वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन जी बी पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान में किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्व आयुर्वेद मिशन के अध्यक्ष प्रो (डॉ.) जी एस तोमर ने बताया की मिलेट्स वर्ष का प्रमुख उद्देश्य लोगों में श्री अन्न के प्रति जागरूकता पैदा करना और इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित करना है जिससे श्री अन्न खेत से लेकर आम आदमी की थाली में आ सकें। आज श्री अन्न भारत मे समग्र विकास का माध्यम बन रहा है और भारत मिलेट्स ईयर की अगुवाई कर रहा है और जब हम किसी संकल्प को लेकर आगे बढ़ते है तो उसे मंज़िल तक पहुंचाना भी जरूरी है। स्वास्थ्य और पोषण की दृष्टि से श्री अन्न बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए आज इनको सुपरफूड और पोषक अनाज कहा जा रहा है। श्री अन्न प्राचीन काल से हमारे एग्रीकल्चर, कल्चर और सिविलाइज़ेशन का हिस्सा रहे हैं।
भारत में बाजरा, ज्वार, सावा, कुटकी, कोदो, रागी, कंगनी, चीना, कुट्टू प्रमुख रूप से पैदा किए जाते हैं जिनका आयुर्वेद ग्रंथो और निघंटुओं मे क्षुद्र धान्य या तृण धान्य के रूप मे वर्णन है। डॉ . तोमर ने कहा किशीघ्र ही इन पोषक अनाज से बनने वाले विभिन्न पकवान के लिए कार्यशाला का आयोजन महिलाओं के लिए किया जाएगा।
मुख्य अतिथि पारि पुनर्स्थापन वन अनुसन्धान केंद्र प्रयागराज के निदेशक डॉ. संजय सिंह ने बताया कि मिलेट्स भूमि की उर्वरा शक्ति को बढाने में योगदान करता है साथ ही इसकी खेती पर्यावरण को भी संरक्षित करती है।
श्री अन्न क्लाइमेट रजिस्टेंट है जिससे प्रतिकूल जलवायु में भी मिलेट्स का आसानी से उत्पादन हो जाता है। मिलेट्स की एक बड़ी खूबी ये है कि इसे केमिकल के बिना कम वक्त मे सूखा ग्रस्त क्षेत्र मे भी भी प्राकृतिक तरीके से उगाया जा सकता है। यानी मिलेट्स मानव और मिट्टी, दोनों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने की गारंटी देते हैं।
प्रतापगढ़ से आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ. अवनीश पाण्डेय ने बताया कि श्री अन्न विशुद्ध जैविक है क्योंकि रासायनिक खाद कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाता है। श्री अन्न ग्लूटेन रहित होता है जिससे यह आसानी से पच जाता है।
इसके साथ ही कोलन कैंसर, सिलियक डिजीज से भी बचाव करता है। ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने की वजह से मधुमेह रोगियों के लिए लाभकारी हैं। ये हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता, ओज को बढ़ाते हैं,/बलकारी हैं।
मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की पूर्व शोध अधिकारी डा. शांति चौधरी ने कहा कि महिलाएं परिवार की धुरी हैं इसलिए इन्हें स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहना होगा।आज दो में से एक महिला आयरन की कमी से ग्रसित है।गर्भवती महिलाओं में कैल्शियम आयरन सप्लीमेंट के रूप में देना पड़ता है,बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। श्री अन्न इन सभी समस्याओं के लिए समाधान हो सकता है क्योंकि इसमे मौजूद आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन्स, फाइबर एवं अन्य न्यूट्रिएंट्स लाभकारी हो सकते हैं। श्री अन्न एनीमिया मोटापा मधुमेह हाइपरटेंशन कैंसर, कोरोनरी हार्ट डिसीज, कोलेस्ट्रॉल की समस्या ओस्टियोआर्थराइटिस एवं अन्य लाइफस्टाइल डिसऑर्डर में लाभकारी हो सकता है।कैल्शियम अधिक होने से हड्डियों को मजबूत बनाता है। बच्चों एवं प्रजनन आयु वर्ग की महिलाओं के लिए लाभकारी है।
जी बी पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चन्द्रैया ने बताया कि खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा, आजीविका सुरक्षा, जलवायु सुरक्षा के लिए एक बार फिर मोटा अनाज समय की मांग है।
डा बी एस रघुवंशी ने कहा कि
हमने मोटा अनाज , गरीबों का अनाज कहकर जिसे नकार दिया गया आज सुपरफूड बनकर अपनी पहचान बना रहा है। चिकित्साधिकारी डा भरत नायक ने कहा कि जल जीवन जलवायु को बचाना है, मिलेट्स अपने भोजन में लाना है।
संगोष्ठी के अंत है विशेषज्ञों ने छात्रों द्वारा पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दिये।
कार्यक्रम मे प्रो जी एस तोमर, डॉ. संजय सिंह, डा शांति चौधरी, डा हजारी लाल, डा भरत नायक, डा अवनीश पाण्डेय, डॉ. चन्द्रैया, अनुराग अस्थाना, राजेन्द्र कुमार सिंह, डॉ हजारीलाल, डॉ जय प्रकाश त्रिपाठी, कार्तिकेय पाण्डेय, सुशील कुमार छात्र एवं छात्र छात्रायें उपस्थित रहे। इस अवसर पर श्री राजेन्द्र कुमार सिंह एवं अनुराग अष्ठाना के ए जी आर ग्रुप के द्वारा स्टार्टप के रूप में निर्मित “श्री धान्यम्” मल्टीग्रेन आटे का भी लोकार्पण अतिथियों के द्वारा किया गया । कार्यक्रम के संचालन में ग्यूफिक फ़ार्मा के श्री चन्दन वर्मा एवं श्री सुजीत कुमार पाण्डेय ने सहयोग प्रदान किया । अन्त में राष्ट्र गान के द्वारा कार्यक्रम का समापन हुआ ।
