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जैन समाज ने की दसलक्षण पर्व के छठें दिन उत्तम संयमधर्म की पूजा 

जैन समाज ने की दसलक्षण पर्व के छठें दिन उत्तम संयमधर्म की पूजा 

प्रयागराज, दिगंबर जैन पंचायती सभा प्रयाग के तत्वाधान में दसलक्षण पर्व के छठें दिन उत्तम संयमधर्म की पूजा की गयी। प्रात: भगवान का अभिषेक, शांतिधारा एवं दसलक्षण विधान का आयोजन मुनि पावन सागर महाराज एवं मुनि श्री सुभद्र सागर के सानिध्य में एवं पंडित सुनील जैन के निर्देशन में किया गया।


शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में सुगंध दशमी पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर अष्ट कर्मों के नाश के लिए जैन समाज के लोगो ने अग्नि में धूप डाल कर विश्व शांति की कामना की। इस दौरान महिलाओं ने निर्जला व एकासन व्रत रखकर कथा का वाचन कर पूजा पाठ किया।


उत्तम संयम धर्म के बारे में चर्चा करते हुए मुनि पावन सागर ने बताया कि  “संयम खलु जीवनम्” कहकर शास्त्रों में आचार्यों ने संयम को ही जीवन की संज्ञा दी है। प्रत्येक स्थान पर नियंत्रण बहुत जरूरी होता है, बिना नियंत्रण के कोई भी व्यवस्था नहीं चल सकती. संयम जीवन का नियंत्रण है। संयम के अभाव में धर्म शुरू भी नहीं हो पाता है। संयम दो प्रकार का होता है, इंद्रिय संयम और प्राणी संयम। साधु पूर्ण संयम का पालन करते हैं और गृहस्थ अपनी भूमिका और शक्ति के अनुसार संयम पालते हैं। सम्यग्दर्शन पूर्वक जो संयम होता है उसे ही उत्तम संयम कहा गया है।


शाम में सामूहिक आरती एवं जैन महिला मंडल के तत्वाधान में आरती थाल सजाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमे महिलाओ एवं बच्चों ने उत्साह के साथ भाग लिया। उत्कृष्ट थालियो को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार दिये गये। कल सोमवार को उत्तम तप धर्म की आराधना की जायेगी।

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