बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए उतरीं समाज सेविका असरा नवाज़ — मानवता की मिसाल बनीं

प्रयागराज — समाज सेवा की दुनिया में एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश करते हुए, असरा नवाज़ ने बाढ़ पीड़ितों के दर्द को न केवल महसूस किया, बल्कि अपनी 11 वर्षीय बेटी के साथ अकेले राहत कार्यों में जुट गईं। जब अधिकांश लोग घरों में सुरक्षित थे, तब असरा जी लगातार तीन दिनों तक लोगों की सहायता करती रहीं।
राहत सामग्री वितरण से लेकर ज़रूरतमंदों तक भोजन और कपड़े पहुँचाने तक, उन्होंने हर मोर्चे पर निःस्वार्थ सेवा दी। इसके बावजूद उन्होंने राहत शिविर केंद्रों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और वहां रह रहे लोगों से सीधे मिलकर उनका हालचाल जाना।
असरा नवाज़ का कहना है कि किसी नेक कार्य के लिए महिला या पुरुष होना मायने नहीं रखता, बल्कि ज़ज्बा होना जरूरी है। वे मानती हैं कि सेवा भावना ही सबसे बड़ी पहचान है।
सबसे सराहनीय बात यह रही कि उन्होंने किसी भी लाभार्थी की फोटो नहीं खींची और न ही सोशल मीडिया प्रचार की चाह रखी। असरा नवाज़ का यह कदम आज के दौर में एक मिसाल बन गया है, जब कई लोग मदद से ज्यादा प्रचार में लगे रहते हैं।
असरा नवाज़ के इस कार्य ने साबित कर दिया है कि अगर दिल में सेवा का जज़्बा हो, तो कोई भी मुश्किल राह नहीं होती। समाज को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए और ज़रूरतमंदों के लिए आगे आना चाहिए।
