Thursday, January 29Ujala LIve News
Shadow

समस्याओं के बावजूद कर्तव्य से विमुख नहीं हुए शिव, स्वाती फाउंडेशन ने दी विदाई

समस्याओं के बावजूद कर्तव्य से विमुख नहीं हुए शिव, स्वाती फाउंडेशन ने दी विदाई

शिक्षा प्रशासन में अपनी सादगी, कार्यकुशलता और कर्तव्यनिष्ठा से विशिष्ट पहचान बना चुके खंड शिक्षाधिकारी शंकरगढ़, शिव अवतार के विकासखंड धनुपुर स्थानांतरण के अवसर पर स्वाति फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा एक गरिमामय विदाई समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रयागराज में ” लोक समर्पण भवन ” में स्नेह, सम्मान और भावनाओं से ओतप्रोत वातावरण में संपन्न हुआ।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए ट्रस्ट की सक्रिय सदस्य, शिक्षाविद् एवं वरिष्ठ समाजसेविका डॉ. अर्चना सिंह ने शिव अवतार को बुके, अंगवस्त्रम और मोमेंटो भेंट कर सम्मानित करते हुए कहा कि शिव अवतार केवल एक प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि संवेदनशील नेतृत्व और मानवीय मूल्यों के प्रतीक हैं। उनके कार्यकाल ने शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों के बीच एक नया भरोसा स्थापित किया है। आज हम उन्हें सम्मानित नहीं, बल्कि उनके योगदान को नमन करने एकत्र हुए हैं।”
इस विशेष अवसर पर जिला पंचायत प्रयागराज के वित्त एवं लेखा परीक्षक अजीत विक्रम सिंह ने कहा “शासन की नीतियों को ज़मीन पर उतारना और जनभावनाओं को समझना दो अलग बातें हैं—और इन दोनों को जिस संतुलन और सहजता से श्री शिव अवतार जी ने निभाया, वह उन्हें विशिष्ट बनाता है। उन्होंने शिक्षा प्रशासन में कार्यसंस्कृति और संवाद की नई मिसाल पेश की है।” एडीएम शिवानी सिंह ने भी शुभकामनाएं प्रेषित की,
शिक्षक नेता डॉ. चंद्रशेखर यादव ने भी भावपूर्ण शब्दों में अपने विचार रखते हुए कहा कि आज का दिन केवल विदाई का नहीं, बल्कि शिक्षा के एक सुनहरे अध्याय को स्मरण करने का है। शिव अवतार ने शिक्षकों की समस्याओं को न केवल सुना, बल्कि उन्हें समाधान का सम्मान भी दिया। उनके जैसा अधिकारी होना ही शिक्षक समाज की सबसे बड़ी ताक़त है।”
कार्यक्रम में शिक्षकों और समाजसेवियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें प्रमुख रूप से शिक्षक नेता विजय कुमार सिंह शिवाकांत सिंह, अरुण सिंह, कौशलेश सिंह, रामचंद्र यादव सर्वेश सिंह आदि शिक्षक शामिल रहे। सभी ने शिव अवतार के आगामी कार्यकाल की सफलता की कामना करते हुए उन्हें शुभाशीर्वाद प्रदान किया।
इस अवसर ने यह सिद्ध कर दिया कि कर्तव्य और करुणा का जब संगम होता है, तब एक अधिकारी जनमानस का आदर्श बन जाता है।
स्वाति फाउंडेशन ट्रस्ट की यह पहल मानवीय मूल्यों और शिक्षक-सम्मान की परंपरा को एक नई ऊंचाई प्रदान करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *