धरती के भगवान ने दी खुशियों की सौगात,डॉ. प्रीति हॉस्पिटल, झुंसी में नवजीवन की मिसाल, मृतप्राय शिशु को मिला नया जीवन

प्रयागराज, झूसी,
“जाको राखे साइयों, मार सके न कोय” यह कहावत प्रयागराज के झुंसी में सच साबित हुई, जब रीवा (मध्य प्रदेश) से आए एक दंपति को डॉ. प्रीति हॉस्पिटल में निराशा के बीच उम्मीद की किरण मिली।
दंपत्ति का बेटा गर्भ में ही दम तोड़ चुका था। लगातार चार अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद भी कहीं से मदद नहीं मिल पाई। थक-हारकर जब परिजन झूसी पहुँचे तो उनकी आखिरी उम्मीद भी धुंधली नज़र आ रही थी। लेकिन कहते हैं – जहाँ सच्चा प्रयास होता है, वहाँ चमत्कार भी होता है।
हॉस्पिटल पहुँचते ही डॉक्टरों और स्टाफ ने परिजनों को हिम्मत दी। प्रमुख स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीति त्रिपाठी ने तुरंत निर्णय लेते हुए ऑपरेशन किया।
नीले पड़ चुके बच्चे को जब बाहर निकाला गया तो पूरे ऑपरेशन थियेटर में सन्नाटा छा गया। लेकिन अचानक बच्चे ने अपना दाहिना पैर हल्का सा हिलाया और फिर धीमी-सी रोने की आवाज आई। उस क्षण पूरे माहौल में मानो जीवन की घंटी बज उठी। तुरंत डॉक्टरों ने नवजात को अत्याधुनिक NICU में पहुँचाया। कई घंटे की मॉनिटरिंग और इलाज के बाद बच्चे की सांसें सामान्य होने लगीं। कुछ दिनों बाद बच्चा पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। मां भी पूरी तरह सुरक्षित रहीं।
“हम चार अस्पतालों में भटक चुके थे। हर जगह से सिर्फ मायूसी मिली। यहां आकर लगा कि भगवान ने धरती पर डॉक्टर के रूप में हमें अपनी मदद भेज दी।” “ये डॉक्टर नहीं, हमारे लिए भगवान का रूप हैं। हमारे घर की रौनक वापस ले आए।” बच्चे की दादी ने भावुक होकर कहा-
डॉ. प्रीति त्रिपाठी ने कहा “चिकित्सा विज्ञान में प्रयास करना हमारा कर्तव्य है, लेकिन परिणाम ईश्वर की देन। यह केस कठिन था, लेकिन हमारी टीम और आधुनिक सुविधाओं ने मिलकर इसे संभव बनाया।”
यह घटना सिर्फ एक मेडिकल सक्सेस स्टोरी नहीं, बल्कि यह संदेश है कि उम्मीद कभी नहीं छोड़नी चाहिए। डॉक्टरों का समर्पण और भगवान की कृपा मिलकर चमत्कार कर सकती है।
