परशुराम कुंड में वरुण पूजन के साथ सात दिवसीय महारुद्र एवं राज राजेश्वरी महा आराधना महायज्ञ शुरु

यज्ञ का सनातन संस्कृति में विशेष महत्व है – शंकराचार्य अधोक्षजानंद देवतीर्थ
परशुराम कुंड, लोहित। परशुराम कुंड में वरुण पूजन कर भव्य कलश यात्रा के साथ सात दिवसीय रुद्र महायज्ञ एवं माँ राज राजेश्वरी महा आराधना महायज्ञ की सोमवार को शुरुआत हुई। गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ के सानिध्य में निकली इस शोभायात्रा में राज्य के उपमुख्यमंत्री चौना मीन, विधायक गण, विभिन्न निकायों के अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिकारी, साधु संत, विद्वान आचार्य एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल थे। कलश यात्रा के दौरान हर हर महादेव के जय घोष से संपूर्ण वन क्षेत्र गूंजायमान हो रहा था।जनजातीय स्त्री एवं पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। कलश यात्रा परशुराम कुंड मठ स्थित यज्ञशाला में समाप्त हुई।
इस अवसर पर शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में यज्ञ का विशेष महत्व है। यह सर्व मनोकामना को सिद्ध करता है। यज्ञ की परंपरा हमारे समाज में अनादि काल से है। प्रभु श्री राम का जन्म भी यज्ञ के माध्यम से ही हुआ था। उन्होंने कहा कि राज्य के उपमुख्यमंत्री चौना मीन का सनातन संस्कृति से गहरा लगाव है। उन्होंने महायज्ञ में भाग लेकर लोगों को शांति और विकास का संदेश दिया है। अरुणाचल प्रदेश में सूरज का प्रकाश पृथ्वी पर सबसे पहले फैलता है। इस यज्ञ से पूर्वोत्तर समेत सभी राज्यों में विकास के नये युग का सूत्रपात होगा।
शंकराचार्य ने कहा कि गणेश पूजन के साथ यज्ञ की शुरुआत हुई है। इससे यज्ञ विधि विधान के साथ संपन्न होगा। सुखद यह है कि पूजन के समय इंद्र देवता ने भी रिमझिम बारिश की फुहारों के साथ श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। महायज्ञ का समापन 7 सितंबर को होगा। वहीं सरकार के आला अधिकारी गण व्यवस्था में तैनात हैं और हिमालयी राज्य हर हर महादेव और धर्म के जयघोष से गुंजायमान हो रहा है। शंकराचार्य के राज्य में प्रवास और धार्मिक अनुष्ठान को लेकर स्थानीय लोगों में भारी उत्साह है। यज्ञ के संपादन के लिए विभिन्न तीर्थों के आचार्य दंडी स्वामी एवं संत महंत आए हुए हैं। परशुराम कुंड अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिला अंतर्गत घनघोर जंगल में स्थित है। लोहित नदी के तट पर बसा यह त्रेतायुगीन पौराणिक स्थल है।
