हिंदी को समर्पित पुस्तक लोकार्पण,संवाद, काव्य पाठ एवं सम्मान समारोह शब्दोत्सव 2025 का हुआ आयोजन

प्रयागराज हिन्दुस्तानी एकेडेमी के सभागार में कैलाश गौतम सृजन संस्थान की ओर से डॉ सरोज बिसारिया एवं बाबू जगदीश सहाय हिसारिया स्मृति राजभाषा हिंदी को समर्पित पुस्तक लोकार्पण,संवाद, काव्य पाठ एवं सम्मान समारोह शब्दोत्सव 2025 का आयोजन किया गया जिसमें डॉ सरोज बिसारिया की सात तथा जगदीश सहाय बिसारिया की एक पुस्तक का लोकार्पण सम्मानित अतिथियों एवं वक्ताओं के हाथों हुआ।
नाट्य निर्देशक श्री शैलेश श्रीवास्तव जी को डॉ सरोज बिसारिया सम्मान तथा डॉ अरविन्द श्रीवास्तव जी को जगदीश सहाय बिसारिया सम्मान प्रदान किया गया।
प्रारंभ में मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण तथा सरस्वती वंदना से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ।
स्वागत प्रोफेसर राहुल बिसारिया ने किया तथा समारोह का संचालन डॉ श्लेष गौतम ने किया।
आभार देवेन्द्र राजभर ने किया।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार जी ने कहा कि ऐसे स्मृति समारोह हमारी परंपरा और संस्कृति का परिचायक है।अपने माता-पिता की पुस्तकों का प्रकाशन और पुस्तकों के लोकार्पण के माध्यम से हम अपने पुरखों को सच्ची श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
शब्दोत्सव 2025 प्रयागराज की सांस्कृतिक गरिमा और पहचान का लोक महोत्सव है।
समारोह अध्यक्ष लोकनाट्य निर्देशक अतुल यदुवंशी जी ने कहा कि डॉ सरोज बिसारिया जी के वृहद और विविधा लेखन से आज आश्चर्यजनक रूप से परिचित हो रहा हूं और सच में अद्भुत लेखनी है उनकी।
कलाकारों और कवियों की संघर्ष क्षमता चुनौतियों से और समृद्ध और विस्तृत होती है।
डॉ श्लेष गौतम ने अपना दोहा पढ़ा
बाहर के तम को हरे,जैसे इक आदित्य
भीतर के तम को हरे,वैसे ही साहित्य
साथ ही कहा कि प्रयागराज साहित्य कला संस्कृति की त्रिवेणी है और प्रयागराज परंपरा-प्रयोग-परिवर्तन-प्रतिरोध की श्री धरा है। साहित्यिक उत्सव हमारी मनुष्यता और संवेदनशीलता का प्रतिबिम्ब है।
डॉ सरोज सिंह ने कहा कि ऐसे साहित्यिक समारोह हमारे समाज को मनुष्य बने रहने की प्रेरणा देता है क्योंकि हमारी भावनाओं का आकाश रचती हैं ।
डॉ सुधा श्रीवास्तव ने अपने निजी और आत्मीय संस्मरण साझा किए साथ ही कहा कि सरोज बिसारिया जी का कृतित्व एवं व्यक्तित्व दोनों ही अनुकरणीय है।
प्रोफेसर रंजीत सिंह ने कहा कि सरोज बिसारिया जी का लेखन अपने समय का सच है और सत्य का साक्षात्कार है।
श्री प्रमोद द्विवेदी ने कहा कि राजभाषा हिंदी और स्मृति समारोह हमारी सांस्कृतिक और मानवीय संदर्भों का समग्र संवाद है।
तत्पश्चात काव्य गोष्ठी में डॉ श्लेष गौतम,कुमार विकास,त्रिनेत्र दूबे,मिस्बाह इलाहाबादी,वंदना शुक्ला,अभिजीत मिश्रा और डॉ अरविन्द श्रीवास्तव ने कविताओं का पाठ किया।
डॉराष्ट्रीय शब्दोत्सव 2025
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आज शनिवार 20 सितंबर 2025 को शाम 04 बजे हिन्दुस्तानी एकेडेमी के सभागार में कैलाश गौतम सृजन संस्थान की ओर से डॉ सरोज बिसारिया एवं बाबू जगदीश सहाय हिसारिया स्मृति राजभाषा हिंदी को समर्पित पुस्तक लोकार्पण,संवाद, काव्य पाठ एवं सम्मान समारोह शब्दोत्सव 2025 का आयोजन किया गया जिसमें डॉ सरोज बिसारिया की सात तथा जगदीश सहाय बिसारिया की एक पुस्तक का लोकार्पण सम्मानित अतिथियों एवं वक्ताओं के हाथों हुआ।
नाट्य निर्देशक श्री शैलेश श्रीवास्तव जी को डॉ सरोज बिसारिया सम्मान तथा डॉ अरविन्द श्रीवास्तव जी को जगदीश सहाय बिसारिया सम्मान प्रदान किया गया।
प्रारंभ में मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण तथा सरस्वती वंदना से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ।
स्वागत प्रोफेसर राहुल बिसारिया ने किया तथा समारोह का संचालन डॉ श्लेष गौतम ने किया।
आभार देवेन्द्र राजभर ने किया।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार जी ने कहा कि ऐसे स्मृति समारोह हमारी परंपरा और संस्कृति का परिचायक है।अपने माता-पिता की पुस्तकों का प्रकाशन और पुस्तकों के लोकार्पण के माध्यम से हम अपने पुरखों को सच्ची श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
शब्दोत्सव 2025 प्रयागराज की सांस्कृतिक गरिमा और पहचान का लोक महोत्सव है।
समारोह अध्यक्ष लोकनाट्य निर्देशक अतुल यदुवंशी जी ने कहा कि डॉ सरोज बिसारिया जी के वृहद और विविधा लेखन से आज आश्चर्यजनक रूप से परिचित हो रहा हूं और सच में अद्भुत लेखनी है उनकी।
कलाकारों और कवियों की संघर्ष क्षमता चुनौतियों से और समृद्ध और विस्तृत होती है।
डॉ श्लेष गौतम ने अपना दोहा पढ़ा
बाहर के तम को हरे,जैसे इक आदित्य
भीतर के तम को हरे,वैसे ही साहित्य
साथ ही कहा कि प्रयागराज साहित्य कला संस्कृति की त्रिवेणी है और प्रयागराज परंपरा-प्रयोग-परिवर्तन-प्रतिरोध की श्री धरा है। साहित्यिक उत्सव हमारी मनुष्यता और संवेदनशीलता का प्रतिबिम्ब है।
डॉ सरोज सिंह ने कहा कि ऐसे साहित्यिक समारोह हमारे समाज को मनुष्य बने रहने की प्रेरणा देता है क्योंकि हमारी भावनाओं का आकाश रचती हैं ।
डॉ सुधा श्रीवास्तव ने अपने निजी और आत्मीय संस्मरण साझा किए साथ ही कहा कि सरोज बिसारिया जी का कृतित्व एवं व्यक्तित्व दोनों ही अनुकरणीय है।
प्रोफेसर रंजीत सिंह ने कहा कि सरोज बिसारिया जी का लेखन अपने समय का सच है और सत्य का साक्षात्कार है।
श्री प्रमोद द्विवेदी ने कहा कि राजभाषा हिंदी और स्मृति समारोह हमारी सांस्कृतिक और मानवीय संदर्भों का समग्र संवाद है।
तत्पश्चात काव्य गोष्ठी में डॉ श्लेष गौतम,कुमार विकास,त्रिनेत्र दूबे,मिस्बाह इलाहाबादी,वंदना शुक्ला,अभिजीत मिश्रा और डॉ अरविन्द श्रीवास्तव ने कविताओं का पाठ किया।
