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शरद पूर्णिमा आस्था और विज्ञान की अनूठी त्रिवेणी= कृष्ण मनोहर

शरद पूर्णिमा आस्था और विज्ञान की अनूठी त्रिवेणी= कृष्ण मनोहर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने धूमधाम से मनाया शरद पूर्णिमा और वाल्मीकि जयंती

प्रयागराज। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से शरद पूर्णिमा उत्सव और वाल्मीकि जयंती धूमधाम से मनाया गया। प्रयागराज विभाग में नगर सह कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसी प्रकार रज्जू भैय्या नगर, प्रयाग दक्षिण की ओर से साठ फीट रोड स्थित सरस्वती शिशु मंदिर राजरूपपुर में शरद पूर्णिमा उत्सव और वाल्मीकि जयंती मनाई गई। कार्यक्रम में एकल गीत प्रवीण पांडेय, अमृत वचन नक्षत्र द्वारा कराया गया। बौद्धिक भाग प्रचार प्रमुख कृष्ण मनोहर का रहा। इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने चंद्रमा की रोशनी में रखे खीर का भोग लगाते हुए प्रसाद ग्रहण किया। प्रयाग दक्षिण भाग के भाग प्रचार प्रमुख और अपर शासकीय अधिवक्ता कृष्ण मनोहर ने कहा कि शरद पूर्णिमा का संबंध सिर्फ आस्था आध्यात्म से ही नहीं है, बल्कि पुरातन समय से इसका संबंध विज्ञान से रहा है। यह वह रात है, जब प्रकृति स्वयं एक अद्भुत औषधालय बन जाती है। चंद्रमा की सोलह कलाओं की पूर्ण शक्ति, खीर का वैज्ञानिक सेवन और वातावरण की अद्वितीय शुद्धता यह सब मिलकर इस पर्व को आध्यात्म, आस्था व विज्ञान का एक अनूठा त्रिवेणी बनाती हैं। कहा कि किष्किंधाकांड में संत तुलसीदास जी ने शरद ऋतु का बड़ा ही मनोरम वर्णन किया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता नीतू सिंह ने की। इस मौके पर भाग प्रचारक डा देवदत्त, विभाग प्रचार प्रमुख वसु, भाग कार्यवाह मनोज, सह भाग कार्यवाह वीरेंद्र, भाग व्यवस्था प्रमुख आत्मदेव, भाग शारीरिक शिक्षण प्रमुख विवेक, नगर संघचालक रवि प्रकाश, सह संघचालक राजकुमार, नगर कार्यवाह भूपेंद्र, सह नगर कार्यवाह रविनाथ, अमित, विजय, मनीष, अम्बरीष, चंद्रभूषण, घनश्याम, हेमंत, सुनील, अनुराग, हरि प्रसाद, रामानुज, कमल देव के साथ ही मातृशक्ति एवं समाज के बंधु उपस्थित रहे।

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