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सकल हिंदू समाज के तत्वावधान में दो दर्जन हिंदू सम्मेलन हुए संपन्न 

 

 

 

सकल हिंदू समाज के तत्वावधान में दो दर्जन हिंदू सम्मेलन हुए संपन्न 

प्रयागराज । पूरे जिले के विभिन्न अंचलों में दो दर्जन हिंदू सम्मेलन संपन्न हुए।सकल हिंदू समाज के तत्वावधान में आयोजित इन सम्मेलनों में हिन्दू समाज के सभी घटक के लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लेकर हिंदुत्व की धारा को और तेज कर दिया। अलग-अलग स्थान पर संपन्न हुए हिंदू सम्मेलनों में विभिन्न वक्ताओं ने एक स्वर से कहा कि
इन सम्मेलनों का उद्देश्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को बल देना है।
रविवार को रणजीत पण्डित इण्टर कालेज लोहगरा में आयोजित विशाल हिंदू सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल जी ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि दुनिया को सुरक्षित करने के लिए हिंदुओं का संगठित होना जरूरी है। हिंदू समाज की सुप्त चेतना जागृत होने से यह राष्ट्र सुदृढ़ होगा तथा वैभव के परम शिखर पर इसे पहुंचाया जा सकता है। क्षेत्र प्रचारक, पूर्वी उत्तर प्रदेश ने आगे कहा कि मुगलिया सल्तनत को चुनौती देने वाले गुरु तेगबहादुर की बलिदान की 350वी जयंती, आजादी के महा नायक बिरसा मुंडा के बलिदान का 150वा वर्ष यह शताब्दी वर्ष है। दुनियां को सुख शान्ति का संदेश देकर सुरक्षा प्रदान करने के लिए एकमात्र धर्म सनातन धर्म वसुधैव कुटुंबकम् का उद्घोष करता है। इसलिए दुनिया को सुरक्षित रखने के लिए हिंदुओं को संगठित करना है। हर धार्मिक आयोजन के बाद धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, विश्व का कल्याण हो का भाव मात्र सनातन और हिन्दू धर्म में ही है।
मुख्य वक्ता ने आगे कहा कि तमाम दुनियां के देशों की संस्कृति नष्ट हो गई। किन्तु भारतवर्ष में हजारों संघर्षों के बाद भी अपना अस्तित्व और संस्कृति धर्म के सहारे बचा रहा। उसको तोड़ने के लिए विधर्मियों द्वारा खड़यंत्र कर तमाम आंदोलन कर जातियों में बांट कर तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जिन महापुरुषों ने अपना सम्पूर्ण जीवन देश, समाज को एक करने का काम में समर्पित किया, आज उन्हीं के नाम पर उनके वक्तव्यों को तोड़ मरोड़ कर दिखाते हुए समाज को बांटने का प्रयास किया जा रहा है। उनके उपदेश सम्पूर्ण समाज और राष्ट्र के लिए थे।अपने जाति के बन्धन से मुक्त हो कर विभेद पैदा करने वाले विधर्मियों से डट कर सामना करना पड़ेगा। तभी हम हिन्दू समाज और संस्कार की सुरक्षा कर सकते हैं। छात्राओं को नकली कलावा, लॉकेट पहन कर लव जेहाद में फंसाने वालो से बच्चों को बचाने का काम करना पड़ेगा। छद्म वेश धारण कर हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करा कर ईसाई बनाया जा रहा है। स्वामी विवेकानंद ने कहा कि जब कोई एक हिन्दू अपना धर्म छोड़ कर धर्म परिवर्तन करता है तो इस देश का एक और दुश्मन खड़ा होता है। धर्म परिवर्तन करने वाले सभी हिन्दू बंधुओं को संकल्प के साथ घर वापसी कराना पड़ेगा। आज चर्च की जगह इशू मंदिर, मरियम मन्दिर बोलने लगे हैं। बहुत पैसा कमा कर सोना पहने हुए लोगो की सुरक्षा के लिए लोहा लेना चाहिए। तभी हम और हिन्दू समाज सुरक्षित रहेगा।
कुम्भ में चौसठ करोड़ हिन्दुओं का शांतिपूर्ण समागम सम्मेलन आयोजित हुआ। स्वामी विवेकानंद ने कहा गर्व से कहो हम हिन्दू हैं। 30 अक्टूबर 1990 की कार सेवा का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तत्कालीन मुख्यमंत्री ने कहा था कि अयोध्या में परिंदा पर नहीं मार सकता उस अयोध्या में हिन्दू समाज ने विवादित ढांचे पर भगवा ध्वज फहराया। अमरनाथ में एक लाख पैंतालीस हजार माताओं ने गिरफ्तारी दिया तब प्रशासन को झुकना पड़ा। आज हिंदुओं को जागृति होने से यह जगत जननी भारत माता विश्व के सिंहासन पर विराजमान हैं। बड़े बड़े धर्मनिरपेक्ष राजनेता आज हिंदुओं को जागृति देख कर मन्दिरों का चक्कर लगा रहे हैं। एक जागृत हिन्दू के नाते भारत माता को परम वैभव पर ले जाने के लिए संगठित होना चाहिए।
मुख्य अतिथि श्री श्री 1008 श्री महंत रतन दास जी महाराज (फलहारी बाबा), पीठाधीश्वर फलाहारी आश्रम अरैल नैनी ने सनातन धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि शास्त्र नेत्र है। जो बताता है कि गुरु के वचन और शास्त्र की आज्ञा ही शास्त्र है। हिन्द महासागर और हिमालय के मध्य में रहने वाले सभी हिन्दू हैं बाकी सब पंथ है।संगठन की शक्ति का महत्व बताते हुए कहा कि जहां सुमति तन्ह संपत्ति नाना। शान्ति में सुख है, तभी घर समाज देश का कल्याण होगा। मंचासीन मातृ शक्ति सविता देवी ने हिन्दू समाज और महिला सशक्तिकरण पर विचार व्यक्त किया।विशिष्ट अतिथि महंत ज्ञानेंद्र गोस्वामी जी महाराज, महंत सुजावन देवधाम स्वामी राजेश्वरानंद महाराज, पुजारी मनकामेश्वर धाम लालापुर रहे। अध्यक्षता विमलेश महाराज, मुख्य पुजारी हनुमत निकेतन मंदिर हनुमान नगर ने किया।
समस्त हिन्दू समाज की ओर से आयोजित कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सुरेन्द्र नारायण, विभाग प्रचारक सुबंधु, सतीश ,ब्रह्म प्रताप, नित्यानंद उपाध्याय, सूर्यकांत,आलोक, मनोज, चेतन, शुभम, आदर्श, शिवांशु, सूरज गुप्ता,विजय शंकर, दिवाकर, प्रमोद, अरविन्द, अनुप, राजू सिंह, शिवम, मनोज शुक्ल, श्याम सुंदर, कुमार सतीश राजेश, राजेंद्र, नरेंद्र, प्रेम चन्द्र,अनुप केसरवानी,रोहित, रवि , शिवदत्त,सुजीत, विभव, अशोक,सत्यम आदि सहित हजारों लोग उपस्थित रहे।
यह सम्मेलन समाज के हर वर्ग को जोड़ने, सकारात्मक दिशा देने और हिन्दू संस्कृति की धरोहर को मजबूती प्रदान करने में मील का पत्थर सिद्ध हुआ। इस कार्यक्रम में उत्साह, उमंग और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

प्रयाग दक्षिण के 12 स्थान पर एक साथ संपन्न हुए इन सम्मेलनों में आम नागरिकों ने अपनी भागीदारी निभाई।

*पाँच परिवर्तन बने विमर्श का केंद्र*
सम्मेलन में परिवार प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध (स्वदेशी चेतना) तथा नागरिक शिष्टाचार जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि इन मूल्यों को अपनाकर ही सशक्त, संगठित और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण संभव है।

सम्मेलन देवप्रयागम, झलवा, केशव बस्ती, लूकरगंज और बहादुरगंज मोहल्लो मैं संपन्न हुए।

प्रमुख वक्ताओं ने कहा कि हिंदू समाज का संगठन ही भारत को सशक्त बन सकता है और राष्ट्र के विखंडन को रोक सकता है।

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