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गांधीजी की थाती समेटने वाला परिवार,दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर 

 गांधीजी की थाती समेटने वाला परिवार,दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर 

प्रयागराज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पद चिन्हों पर चलने वाला परिवार थोड़ी सी जमीन के लिए दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर हो गया है । दरअसल हशमत उल्लाह प्रसिद्ध मैकेनिक थे । जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की मृत्यु हो गई तो पूरा देश शोक में डूब गया उनकी आस्थीयों की विसर्जित किया गया लेकिन बापू की आस्थीयों का कुछ अंश बचा हुआ था । गांधी जी की अंतिम इच्छा थी कि उसी तरीके से गंगा, यमुना और आदऋषि सरस्वती की त्रिवेणी संगम में विसर्जित किया जाए तो उनकी आत्मा को शांति मिलेगी । लेकिन समस्या उस समय आ गई जब उसी फोर्ड गाड़ी को चलाया गया और वह एक कदम भी ना चल सकी । इसके बाद जरूरत हुई उस गांधी परिवहन को पूर्ण सड़क पर चलाने की तो ऐसे समय में खोज की जाने लगी ऐसे मैकेनिक की जो इस रुके हुए वहान को रफ्तार दे सके ऐसे में रोडवेज के अधिकारियों ने एक नायाब मैकेनिक की खोज निकाला और वह मैकेनिक हशमत उल्लाह और उनके बेटे रफत और इरफान उल्लाह की । खास बात यह रही कि इस फोर्ड वी – 8 ट्रक को बनाने के लिए उस दौर में सरकार लाखों रुपए खर्च करने को तैयार थी लेकिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी की थाती को सहेजने वाले इस परिवार ने फूटी कौड़ी भी नहीं ली । इसके बाद सन 2008 में हशमत उल्लाह के परिवार ने गर्व से सांस ली जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी की के अस्थियां विसर्जन के रिक्रिएशन पर बनी फिल्म रोड टू संगम में फोर्ड वी – 8 की इस ट्रक का प्रयोग हुआ और फिल्म निर्माता अमित राय ने हशमत उल्लाह और उनके परिवार को सम्मानित भी किया । इस फिल्म में स्वर्गीय हशमत उल्लाह का किरदार फिल्म अभिनेता परेश रावल ने जीवंत किया । न्याय और कानून को पसंद करने वाले पर्यावरण प्रेमी हशमत उल्लाह ने बूंदआवा जसरा में पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए जमीन खरीदी । उसके बाद हशमत उल्लाह ने शिक्षण संस्थान ज़ेब एकेडमी की आधारशिला 1997 में रखी ।
खास बात यह रही कि इस एकेडमी के रिजल्ट छत प्रतिशत रहा । पर्यावरण विद् शिक्षा विद हशमत उल्लाह के मृत्यु के बाद उनका सपना धूमिल होता गया हालांकि इरफान उल्लाह ने इस सपने को अमली जामा पहनाने की कोशिश की लेकिन समाज और पर्यावरण को ना देख पाने वाले लोगों ने इसे इसके रास्ते में रोड़ा अटका दिया ।
स्वर्गीय हशमत उल्लाह के पुत्र इरफान उल्लाह को स्थानीय लोगों से पता चला की जमीन पर कुछ दबंग लोग बुरी नजर गड़ाए बैठे हैं । इस बात की तस्दीक करने इरफान उल्लाह जब तहसील बारा पहुंचे तो वहां का माजरा देखकर वह दंग रह गए पता चला की धरती का भगवान कहे जाने वाला डॉक्टर एम० इरशाद खान जमीन खोर निकला । उसने अपनी पत्नी नुजहत अफ़रोज़ के नाम इस जमीन की तथ्यों को छुपाते हुए रजिस्ट्री करा रखी है । इस बात से स्तंभ इरफान उल्लाह जब अपनी जमीन की वस्तु स्थिति देखने जा रहे थे यू दौरान डॉक्टर एम आई खान के गुर्गों ने इरफान उल्लाह को रोक लिया और जबरदस्ती जमीन को देने के लिए दबाव बनाने लगे । जमीन खोर डॉक्टर एम आई खान ने कहा कि इस जमीन को किसी भी कीमत पर छीन लेंगे । इस धमकी के बाद जमीन खोर डॉक्टर ने जमीन पर कब्जा करने के लिए भरसक प्रयास किया लेकिन हर बार विफल हुआ । इसकी शिकायत इरफान उल्लाह ने आई.जी.आर.एस , पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी को पत्र के माध्यम से सूचित किया ।

दिनांक 08.03.2025 को थाना घूरपुर के थाना दिवस में एप्लीकेशन को लेकर थाने में इरफान उल्लाह और नुजहत अफरोज पत्नी एम. आई. खान के बीच समझौता हुआ कि न्यायालय का आदेश आने तक उक्त आराजी न० 185 बुढ़ावा जसरा की जमीन पर कोई कार्य नहीं किया जाएगा । इस बात पर दोनों पक्षों ने डी.सी.पी यमुनानगर के सामने सहमत हुए जिसमें गवाही भी हुई ।

उसके बाद इसी बीच नुजहत अफरोज के पति ने अशोक कुमार नाम का भू-माफिया को भी सामने ले आए और वह कानून की नजर में धूल झोंकते हुए इरफान उल्लाह की जमीन पर चोरी से निर्माण करने की कोशिश कर रहा है । इरफान उल्लाह जब शिकायत करते हैं तब कुछ घंटे बाद काम बंद हो जाता है । इस कब्जा दखल को अंजाम देने के लिए छह बार कोशिश की गई लेकिन हर बार एस.डी.एम बारा एवं ए.सी.पी कौंधियारा से शिकायत करने पर काम रोका जाता है। इरफान उल्लाह ओर उनके परिवार की सुरक्षा एवं पीढ़ा का निवारण हेतु मदद की गुहार लगा रहा हैं।

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