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पूर्व महापौर के सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कमेंट करने वाले सिरफिरे के खिलाफ मुकदमा दर्ज

पूर्व महापौर के सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कमेंट करने वाले सिरफिरे के खिलाफ मुकदमा दर्ज

 

मंत्री नन्दी के खिलाफ की थी आपत्तिजनक टिप्पणी

पूर्व महापौर की मीडिया सलाहकार पूनम अग्रवाल ने दी तहरीर

प्रयागराज की पूर्व महापौर एवं भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री श्रीमती अभिलाषा गुप्ता नन्दी के सोशल मीडिया पेज पर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी नन्दी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करना युवक को महंगा पड़ गया। पूर्व महापौर श्रीमती अभिलाषा गुप्ता नन्दी की मीडिया सलाहकार पूनम अग्रवाल ने आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले के खिलाफ कोतवाली में तहरीर दी है।

कोतवाली में दी गई तहरीर में लिखा है कि पूर्व महापौर अभिलाषा गुप्ता नन्दी की ख्याति एक कर्मठ, परिश्रमी समर्पित जनसेवक के रूप में है। उनकी सामाजिक एवं सार्वजनिक गतिविधियां जनमानस के मध्य पहुँचाने में सोशल मीडिया एक सशक्त माध्यम है। वर्तमान में उनके फेसबुक पेज पर 3 लाख 57 हजार की बड़ी संख्या में फॉलोवर कनेक्ट हैं। ऐसे ही इंस्टाग्राम और एक्स पर भी लाखों की संख्या में फॉलोवर्स मौजूद हैं।
विगत दो तीन-दिन से शैलेश श्रीवास्तव नामक फेसबुक आईडी से पूर्व महापौर के विभिन्न फेसबुक पोस्ट के कमेन्ट सेक्शन में बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियां की जा रही हैं। *अभिलाषा अब यह पुष्पमाला इत्यादि संभाल कर रखना…नन्दी की अर्थी सजाने हेतु शीघ्र ही काम आयेगा!*

इस आईडी के एड्रेस सेक्शन में पुणे महाराष्ट्र और इलाहाबाद अंकित है! लेकिन आईडी लॉक है, जिससे अधिक विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है!

इस प्रकार की स्तब्ध करने वाली टिप्पणी घोर मानसिक आघात एवं कष्ट पहुँचाने वाली हैं! यह आशंका है कि यह किसी गहरे षड्यंत्र एवं प्रायोजित योजना का हिस्सा है!
ज्ञात हो कि पूर्व महापौर श्रीमती अभिलाषा गुप्ता नन्दी के पति एवं उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी पर 12 जुलाई 210 को आरडीएक्स रिमोट बम से प्राणघातक हमला हो चुका है। उस वीभत्स हमले में इन्डियन एक्सप्रेस के एक वरिष्ठ पत्रकार और एक सिविल गनर की दुःखद मृत्यु हो गयी थी।

उक्त प्रकरण में प्रचलित मुकदमें का ट्रायल चल रहा है और अब सुनवाई बिल्कुल अन्तिम चरण में है। ऐसे संवेदनशील समय में इस प्रकार की टिप्पणियों की गहन विवेचना एवं यथोचित कार्यवाही आवश्यक है। इसकी पृष्ठभूमि में मुकदमें के आरोपियों पर सम्भावित कार्यवाही की हताशा से उपजा सुनियोजित षड्यंत्र हो सकता है।

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