हर्बल गुटका से तम्बाकू की लत छुड़ाकर केंसर से बचें – डॉ जी एस तोमर

विश्व कैंसर दिवस कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक वैश्विक स्वास्थ्य कार्यक्रम है । 4 फरवरी, 2000 को पेरिस में नव सहस्राब्दी के लिए विश्व कैंसर विरोधी शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया । जिसने विश्व कैंसर दिवस की शुरुआत को चिह्नित किया। तभी से हर साल 4 फरवरी को यह दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य कैंसर की पहचान, उपचार और रोकथाम के बारे में जागरूकता फैलाना और लोगों को शिक्षित करना है। इस दिन, दुनिया भर के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय संगठनों के लोग कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने और बेहतर स्क्रीनिंग, निदान उपकरण, शीघ्र निदान और उन्नत उपचार विकल्पों की आवश्यकता के लिए एकजुट होते हैं। इस वर्ष 2026 के विश्व कैंसर दिवस का विषय (थीम) है “यूनाइटेड बाय यूनिक” (अद्वितीयता द्वारा एकजुट) । जो व्यक्तिगत अनुभवों को सामूहिक आवाज़ में बदलने की बात करता है। यह यूनियन फॉर इण्टरनेशनल केंसर कंट्रोल (यूआईसीसी) द्वारा संचालित एक वैश्विक अभियान है।
कैंसर के खिलाफ यह एकजुटता सही समय पर जांच (स्क्रीनिंग) और उपचार के महत्व पर जोर देती है। इसकी रोकथाम के संबंध में यह बताना आवश्यक है कि केंसर के जोखिम को कई तरीकों से कम किया जा सकता है । जैसे कि फलों और सब्जियों से भरपूर और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और लाल मांस से कम पौष्टिक आहार का सेवन करें। नियमित व्यायाम और स्वस्थ वजन बनाए रखना, तंबाकू उत्पादों के सेवन से परहेज करना, शराब का सेवन न करना , पराबैंगनी किरणों से बचाव के उपायों में सनस्क्रीन का उपयोग करना और सुरक्षात्मक कपड़े पहनना शामिल है । नियमित रूप से अनुशंसित कैंसर जांच में भाग लेना, पर्यावरण में मौजूद हानिकारक रसायनों के संपर्क से बचना, कैंसर पैदा करने वाले ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) वायरस के खिलाफ टीकाकरण कराना आदि हैं ।
केंसर के बचाव के सम्बन्ध में विश्व आयुर्वेद मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं आरोग्य भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो(डॉ०) जी एस तोमर के अनुसार हर दो मिनट पर एक कैंसर मरीज की मौत हो जाती है, यह अत्यंत दुखद है । कैंसर से होने वाली अधिकतर मौतें तंबाकू और तंबाकू जनित पदार्थों के सेवन की वजह से होती हैं । विश्व कैंसर दिवस पर नशा को ना कह लोगों के बीच कैंसर के बचाव के लिए जागरूकता फैलाने का संकल्प लेना चाहिए । उन्होंने बताया कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कैंसर से बच सकते हैं। कैंसर के प्रति जागरूकता एवं बचाव ही सबसे बेहतर इलाज है। विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर कैंसर के सटीक निदान, गुणवत्तापूर्ण उपचार, रोगियों के पुनर्वास और स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में हम सभी को अपनी भागीदारी निश्चित करनी होगी। तम्बाकू युक्त गुटका की लत को छुड़ाने के लिए डॉ तोमर ने धनिया, सोंफ, काली मिर्च, छोटी पिप्पली, सोंठ, मुलैठी, दालचीनी, छोटी व बड़ी इलायची आदि औषधियों को मिलाकर हर्बल गुटका तैयार किया है । जिससे सैकड़ों लोग तम्बाकू युक्त गुटके की लत से मुक्त हो सके हैं । यह गुटका हानिकारक न होकर पाचन शक्ति को दुरुस्त करता है तथा इसकी आदत भी नहीं पड़ती । डॉ तोमर ने अपने चालीस वर्षों के चिकित्सा अनुभव को साझा करते हुए बताया कि प्राथमिक अवस्था के केंसर आयुर्वेद उपचार से साध्य हैं तथा एडवांस स्टेज में पहुँचने पर आयुर्वेद चिकित्सा से न केवल रोगी की आयु में कुछ दिन, महीने या वर्ष जोड़े जा सकते हैं अपितु रोगी के दैनिक जीवन की गुणवत्ता में संतोषजनक सुधार भी होता है तथा इन औषधियों के प्रयोग से कीमोथेरेपी एवं रेडियोथेरेपी के घातक दुष्प्रभाव भी न्यूनतम हो जाते हैं ।
