दारागज मे दुकानजी कोलाज संग्रहालय बना आकर्षण का केन्द्र

प्रगागराज के दारागंज मे उ0 प्र0 का एक ऐसा पहला मिनी कोलाज संग्रहालय बनाकर दुकानजी ने तैयार किया जो लोगो के आकर्षण का केन्द्र बन रहा आगे आने वाली पिढी और देश विदेश से आने वाले पर्यटको के लिये और ही आकर्षण का केन्द्र होगा जिसे देखकर लोगो के मन मे विलुप्त होती हुई चिजो को देखकर यादे ताजा होगी और आने वाली पिढी सोचेगी देखकर पहले ऐसी ऐसी चिजे हुआ करती थी ईसी मकसद से प्रयागराज के दारागंज मे रहने वाले अंन्तराष्ट्रिय मूछ नर्तक और समाजसेवक राजेन्द्र कुमार तिवारी दुकानजी जिन्होने विश्व मे भारत के साथ उ0 प्र0 के प्रयागराज का नाम रोशन किया और अब वो एक अद्भुत विचित्र कोलाज संग्रहालय बनाकर विलूप्त होती हुई पुरानी चिजो को शहर के हर घरो मे जाकर घूम घूम कर पुरानी चिजो को मागकर ऐक जगह संग्रहित कर श्री पंचायति अखाडा महानिर्वाणी के महन्त सचिव यमुना पुरी जी के आशिर्वाद से उनके अखाडे के दिये मकान के 12×8 के कमरे मे संग्रहालय बनाकर प्रयागराज की गरिमा बढाया दुकानजी का कहना है देश,विदेश से प्रयागराज घूमने आने वाले पर्यटक भी ईस कोलाज संग्रहाय को देखे और उन पुरानी चिजो को एक जगह ही संग्रहित सामान जैसे पुराने सिक्के,घडी,रेडियो,ट्राडिस्टर,टार्च,लालटेन, स्टोप,तलवार डाक टिकट,भारत की सबसे बडी लौकी,मिश्र की ईमली,हर तिर्थो के जल,और मुख्य आकर्शण दुनिया की सबसे छोटी सनातन धर्म की रक्षक भगवत गीता,सबसे छोटी कुरान के अलावा और चीजे जो सब एक जगह ही संग्रह की गयी आगे दुकानजी का कहना है अगर सरकार,प्रयागराज के सांसद,विधायक,नगर आयुक्त,महापोर,जिलाधिकारी दारागज मे एक छोटी जगह नगर निगम की खाली पडी है अगर उसे मिनी कोलाज संग्रहालय बनाने के लिये आंबन्टित कर दे तो वहा और भी अद्भुत सुन्दर आकर्षक संग्रहालय बन सकता है जो प्रयागराज को आकर्षित करेगा
