भारतीय संस्कृति की आधारशिला है ‘नर सेवा नारायण सेवा’ – डाॅ. शमशेर जमदग्रि


सर्वविदित है कि भारतवर्ष विश्व का न केवल प्राचीनतम, बल्कि महानतम राष्ट्र भी है। भारतीय संस्कृति विश्व की न केवल सबसे शाश्वत, बल्कि सर्वाधिक वंदनीय सस्कृति भी है। अतः भारतवर्ष अपनी इसी वंदनीय सनातन संस्कृति के आधार पर न केवल प्राचीन काल में विश्व-गुरु के रूप में प्रतिष्ठापित रहा है, बल्कि अब पुनः निकट भविष्य में भी विश्व-गुरु के रूप में प्रतिष्ठापित होने के मार्ग पर तीव्र गति से अग्रसर हो चला है। फलतः, भारतवर्ष के नवयुवकों को भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन के माध्यम से भारतवर्ष के पुनः विश्व-गुरु के रूप में प्रतिष्ठापित होने के सत्कर्म में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का सकुशल निर्वहन करना चाहिए। भारतवर्ष के हृदय प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र में आयोजित सम्प्रति विशाल चिकित्सा शिविर जैसे परोपकारी आयोजन न केवल राष्ट्र सेवा का विशिष्ट माध्यम हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आधारशिला ‘नर सेवा नारायण सेवा’ को भी प्रतिबिंबित करते हैं।’
भारतमातरम राष्ट्रपीठ, नई दिल्ली के सूत्रधार डॉ. शमशेर जमदग्रि (अपर आयुक्त) – भारतवादी साहित्यकार, नई दिल्ली द्वारा उपरोक्त विचार महाराष्ट्र राज्य की सीमा से लगते मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के जनजातीय क्षेत्र कुरई में डॉ. साकेत प्रतिष्ठान, नागपुर, महाराष्ट्र, स्वास्थ्य विभाग, कुरई, जिला सिवनी, मध्य प्रदेश, राष्ट्रार्थ युवा, महाराष्ट्र-गोवा एवं अवंति अस्पताल, नागपुर, महाराष्ट्र द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक विशाल चिकित्सा शिविर के उद्घाटन के अवसर पर ‘मुख्य अतिथि’ के रूप में अपने विशिष्ट संबोधन के दौरान व्यक्त किए गए।
डॉ. जमदग्रि द्वारा इस तथ्य पर विशेष बल दिया गया कि हमारे महान राष्ट्र भारतवर्ष, जो विश्व का न केवल सबसे बड़ा, बल्कि सबसे महान लोकतन्त्र भी है, का नेतृत्व वर्तमान में जनजातीय क्षेत्र से आने वाली मातृ-शक्ति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा अनुकरणीय रूप से किया जा रहा है, जिनके द्वारा भारतीय नववर्ष विक्रम संवत-2083 के श्रीगणेशोत्सव के शुभ अवसर पर प्रातःकाल श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर, श्रीअयोध्या धाम में ‘श्रीराम-यन्त्रम’ की शास्त्र-सम्मत स्थापना एवं सायंकाल श्रीकृष्ण जन्मभूमि, श्रीमथुरा-वृन्दावन धाम में वन्दन-पूजन तथा सर्वविशेष सर्वप्रथमबार भारतवर्ष की किसी माननीया राष्ट्रपति द्वारा ‘श्रीगोवर्धन-परिक्रमा’ आदि सत्कर्म भारतवर्ष के पुनः राम-राज्य के मार्ग पर अग्रसर हो चलने के दिव्य संकेत हैं।
सम्प्रति विशाल चिकित्सा शिविर में अपनी निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने वाले सभी सम्मानित चिकित्सकों को साधुवाद प्रदान करते हुए मुख्य अतिथि द्वारा चिकित्सीय सेवा को जीवन का नोबेल सत्कर्म चित्रित किया गया तथा चिकित्सीय क्षेत्र में आ रहीं नई-नई चुनौतियों के समुचित समाधानार्थ गुणात्मक शोध-कार्य किए जाने का आह्वान भी किया गया। उनके द्वारा ‘नर सेवा नारायण सेवा’ को भारतीय संस्कृति की आधारशिला चित्रित करते हुए बताया गया कि भारतवर्ष में चिकित्सक को जीवन बचाने वाले लौकिक भगवान का दर्जा प्राप्त है।
सम्प्रति विशाल चिकित्सा शिविर में श्री कमलजी मरसकोल्हे – मा. विधायक, सिवनी, मध्य प्रदेश एवं श्री प्रशांत यूकीए (पी.सी.एस.) – उप जिलाधिकारी, कुरई, जिला सिवनी, मध्य प्रदेश की भी गरिमामयी उपस्थिति रही तथा विधायक महोदय द्वारा निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने वाले सभी सम्मानित चिकित्सकों एवं तकनीकी सहायकों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। आयोजक डॉ. अनिल गोल्हर – संस्थापक, डॉ. साकेत प्रतिष्ठान, नागपुर, महाराष्ट्र द्वारा सम्प्रति विशाल चिकित्सा शिविर में उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. जमदग्रि द्वारा अपनी सुप्रसिद्ध काव्य-कृति ‘काव्यांजलि की कलियां’ आयोजक डॉ. अनिल गोल्हर को ससम्मान भेंट की गईं। इस दौरान मंच का सकुशल संचालन श्री स्वप्निल नंदकुमार वाडेकर – महासचिव, राष्ट्रार्थ युवा, महाराष्ट्र-गोवा द्वारा किया गया, जिनका सम्प्रति विशाल चिकित्सा शिविर के प्रबंधन में डॉ. वैभव गोल्हर के साथ महत्वपूर्ण योगदान रहा। सम्प्रति विशाल चिकित्सा शिविर में 500 से अधिक ग्रामीण महिलाओं, पुरुषों एवं बच्चों को निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं प्रदान की गईं।
