भारतीय भाषा में संस्कृत का योगदान प्राचीनता व वैज्ञानिकता पर हुई चर्चा

प्रयागराज
माहासागर शिक्षा समिति व उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में प्रयागराज के हिन्दुस्तानी ऐकेडमी में संस्कृत के भारतीय भाषा में योगदान प्राचीनता व वैज्ञानिकता पर संस्कृत के जानकारों ने विस्तृत व्याख्यान दिया। आचार्य पण्डित शिवेंद्र सारस्वत (शीबू) के संचालन डॉ कमलजीत सिंह के मुख्य आतिथ्य में प्रोफेसर उषा मिश्रा, प्रोफेसर भगवती पाण्डेय,अजय पाण्डेय,श्रीमती अनुलता उपाध्याय,प्रियवत त्रिपाठी, सुरेन्द्र पाण्डेय ने संस्कृत के भारतीय भाषा में योगदान, प्राचीनता व वैज्ञानिकता पर संगोष्ठी में सम्बोधित किया। पंडित शिवेंद्र सारस्वत ने कहा उधमेन हि सिध्यनति कार्याणि न मनोरथेनन हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशान्ति मुखे मृगान अर्थात सिर्फ इच्छा करने से उसके कार्य पूरे नहीं होते बल्कि मेहनत करने से उसके कार्य पूरे होते हैं।वहीं अन्य संस्कृत के ज्ञानियों ने भी अपने विचार रखे। विशिष्ट अतिथि उषा मिश्रा ने संस्कृत में लकारों की संख्या बताते हुए कहा की ऐसे तो संस्कृत में लकारों की संख्या दस होती है लेकिन उसमें से पांच लकारों का उपयोग सबसे अधिक होता है।जिसमें से लट् लिट् लुट् लृट् लोट् अधिक प्रयोग होती है।कहा इन लकारों का प्रथम में ल है इस लिए इसे लकार कहते हैं। प्रोफेसर भगवती पाण्डेय ने कार्यक्रम में कहा चौदह शिव सूत्र क्या हैं? माहेश्वर सूत्र क्या है? संस्कृत में माहेश्वर सूत्र की संख्या कितनी है? बच्चों के सही जवाब देने पर महासागर शिक्षा समिति व उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की ओर से पुरस्कार दिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत शिव वंदना व दीप प्रज्ज्वलित कर हुई। कार्यक्रम में डॉ प्रणव सलूजा,डॉ वकील अहमद, डॉ मज़हर अब्बास,एस एस अब्बास,मीसम अब्बास ने भी अति विशिष्ट अतिथि के तौर पर कार्यक्रम को संबोधित किया। इफ्तेखार आलम खान,एस ए खान ने आगंतुकों का स्वागत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
