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*भारत में हरित क्रांति के समय अमेरिका से आयी गाजर घास (पार्थेनियम हिस्टरोफोरस) अब यहां की फसलों और किसानों के लिए आफत का सबब बन रही*

*भारत में हरित क्रांति के समय अमेरिका से आयी गाजर घास (पार्थेनियम हिस्टरोफोरस) अब यहां की फसलों और किसानों के लिए आफत का सबब बन रही*


नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय व फॉरेस्ट रिसर्च सेंटर फॉर इकोरहाबोलिटेशन,प्रयागराज के संयुक्त में गाजर घास जागरूकता सप्ताह 2022 एवं हरित लेखांकन कार्यक्रम संपन्न,नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय में वनस्पति विज्ञान विभाग एवं एफ आर सी ई आर प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में 16 से 22 अगस्त तक चल रहे गाजर घास समूल उन्मूलन हेतु वृहद अभियान चलाया गया,उपयुक्त कार्यक्रम में बताया गया कि
भारत में हरित क्रांति के समय अमेरिका से आयी गाजर घास (पार्थेनियम हिस्टरोफोरस) अब यहां की फसलों और किसानों के लिए आफत का सबब बन रही है,इस घास की वजह से खेतों में फसलें बर्बाद हो रही हैं और किसान अस्थमा एलर्जी और सांस संबंधित कई बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं,इस अवसर पर एफ आर सी ई आर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ अनुभा श्रीवास्तव डॉ कुमुद दुबे डॉ अनीता तोमर डॉ आलोक यादव विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के डॉ प्रदीप उपाध्याय डॉ शक्ति नाथ त्रिपाठी डॉ आदि नाथ डॉ. रूद्र प्रकाश ओझा विज्ञान डीन डॉ. आशीष शिवम् डॉ अनीता सिंह डॉ अमिताभ चन्द्र द्विवेदी ने अपने विचार प्रस्तुत किए,जागरूकता कार्यक्रम में अंशुमान दुबे बृज मोहन छोटे लाल उज्जवल यादव बृजेश शांति रेशमा सुरेन्द्र यादव कलीम बादल मुन्नीलाल राजीव पाण्डेय एवं विज्ञान संकाय के सैकड़ों छात्र-छात्राएं भी उपस्थित रहे।

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