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*बज्म-ए-अहबाब के तत्वावधान में इनाम हंफि की याद में तरही मुशायरा आयोजित

*बज्म-ए-अहबाब के तत्वावधान में इनाम हंफि की याद में तरही मुशायरा आयोजित

प्रयागराज। करेली स्थित अदब घर में बज्म-ए-अहबाब के तत्वावधान में मशहूर शायर स्वर्गीय इनाम हंफि की याद में तरही मुशायरे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अरबी एवं फारसी विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष सालेह रशीद ने की। मुख्य अतिथि केयर फॉर हेल्थ के संस्थापक एवं अध्यक्ष तथा इंडियन मुस्लिम पब्लिक अफेयर्स कमेटी (IMPAC) के प्रांतीय महासचिव मोहम्मद अकबर अहमद खान रहे।

विशिष्ट अतिथि के रूप में सिविल सोसाइटी इलाहाबाद के सदस्य सुरेंद्र राही और एम.के. एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष शाहाब हंफि मौजूद रहे। कार्यक्रम की सरपरस्ती असरार नियाजी ने की। इस मौके पर बज़्म-ए-अहबाब के अध्यक्ष अमजद हुसैन रावी,सुहैल अख़्तर और असद हुसैन ताबी ने सभी को माला पहना कर उनका खैरमकदम किया !

इस मौके पर सालेह रशीद ने स्वर्गीय इनाम हंफि के साहित्यिक योगदान और उनकी शायरी की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्यिक जगत में अलग पहचान बनाई। असरार नियाजी ने उनके व्यक्तित्व, व्यवहार और साहित्यिक सेवाओं को याद किया। शाहाब हंफि ने इनाम हंफि से जुड़ी यादें साझा करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सुरेंद्र राही ने कहा कि उनकी शायरी में समाज और मानवीय भावनाओं की गहरी झलक देखने को मिलती है।

इसके बाद तय मिसरा “ये जुल्म है कि कलम दस्त-ए-बेहुनर में रहे” पर तरही मुशायरे का सिलसिला शुरू हुआ। असलम इलाहाबादी, अख्तर अजीज, हसीन जीलानी, वाकिफ अंसारी, डॉ. शाहिद खान, फरमूद इलाहाबादी, सुहैल अख्तर, अमजद हुसैन रावी, अलीम उल्लाह, जलाल फूलपुरी, सलाल इलाहाबादी, असद गाजीपुरी, प्रकाश सिंह अश्क और बख्तियार यूसुफ ने अपने कलाम पेश कर खूब दाद बटोरी।

संचालन एडवोकेट बख्तियार यूसुफ ने किया। बज्म-ए-अहबाब के अध्यक्ष एवं स्वर्गीय मशहूर शायर शाकिर हुसैन तशना के बड़े बेटे अमजद हुसैन रावी और भांजे सुहैल अख्तर ने सभी अतिथियों और शायरों का आभार जताया। इस दौरान अशद हुसैन ताबी, सरफराज, अहमद,अकरम शगुन , समेत बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।

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