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KDMC के ‘E-वॉर्ड’ हॉकर हटाने वाले विभाग में ‘खराब कामकाज’ को लेकर सवाल!

KDMC के ‘E-वॉर्ड’ हॉकर हटाने वाले विभाग में ‘खराब कामकाज’ को लेकर सवाल!

क्या चपरासी सूरज कामराज अतिक्रमण हटाने वाले स्क्वाड लीडर की ज़िम्मेदारी संभाल रहे हैं?

बिना लाइसेंस वाले हॉकरों से जबरन वसूली के आरोपों से हंगामा!
मुंबई श्रीकेश चौबे:-
कल्याण-डोंबिवली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (KDMC) के ‘E-वॉर्ड’ में हॉकर हटाने वाले विभाग के कामकाज पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि सूरज कामराज, जो असल में एक चपरासी हैं, हॉकर हटाने वाले विभाग में स्क्वाड लीडर के तौर पर काम कर रहे हैं। इस बात ने नागरिकों और हॉकरों के बीच चर्चा छेड़ दी है।

चपरासी या स्क्वाड लीडर? असल में ज़िम्मेदारी किसकी है?

हालांकि म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के अतिक्रमण विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिकाएं और ज़िम्मेदारियां साफ तौर पर तय हैं, फिर भी यह सवाल उठ रहा है कि एक चपरासी ने स्क्वाड लीडर जैसी भूमिका कैसे संभाल ली। वरिष्ठ अधिकारियों से इस पूरे मामले की जांच करने की मांग की जा रही है।

बिना लाइसेंस वाले हॉकरों से ‘वसूली’ के आरोप

‘E-वॉर्ड’ में बिना लाइसेंस वाले हॉकरों से हज़ारों रुपये जबरन वसूलने के आरोप सामने आए हैं। इस कथित वसूली में सूरज कामराज की भूमिका की जांच करने की मांग की जा रही है।

किसके लिए हो रही है ‘वसूली’? ज़ोरों पर हैं अटकलें

स्थानीय चर्चाओं से पता चलता है कि हॉकर हटाने वाले विभाग के कुछ कर्मचारी नियमित रूप से पैसे वसूल रहे हैं। यह वसूली किसके लिए और किसके कहने पर की जा रही है? अब यह जांच का विषय बन गया है।

क्या अधिकारियों की शह पर चल रहा है काम?

अगर चपरासी के पद पर तैनात कोई कर्मचारी हॉकर हटाने वाले विभाग में अहम भूमिका निभा रहा है, तो क्या ‘E-वॉर्ड’ के अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है? अगर उन्हें जानकारी है, तो कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? और अगर उन्हें जानकारी नहीं है, तो विभाग आखिर कैसे काम करता है? नागरिक ऐसे सवाल उठा रहे हैं।

क्या जांच से ‘वसूली’ का राज़ खुलेगा? ‘एंटी-हॉकर’ विभाग में कथित वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है। साथ ही, CCTV फुटेज, हॉकरों के बयान और संबंधित कर्मचारियों की नियुक्ति व जिम्मेदारियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की भी मांग हो रही है। अतिक्रमण विभाग में चपरासी (peon) के पद पर तैनात कर्मचारी को आखिर क्या खास आधिकारिक जिम्मेदारी सौंपी गई है? क्या अनधिकृत हॉकरों से जबरन वसूली के आरोप सच हैं? और इस कथित ‘वसूली’ से असल में किसे फायदा होता है? अब समय आ गया है कि KDMC प्रशासन जनता के सामने इन सवालों के स्पष्ट जवाब दे।

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