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बढ़वारी कलां में प्रधानमंत्री आवास योजना पर उठे सवाल, पंचायत सचिव की भूमिका को लेकर ग्रामीणों में विरोध!*

*बढ़वारी कलां में प्रधानमंत्री आवास योजना पर उठे सवाल, पंचायत सचिव की भूमिका को लेकर ग्रामीणों में विरोध!*

*जिलाधिकारी के नाम शिकायत से बढ़ी हलचल—आखिर आवास आवंटन का पूरा हिसाब कौन देगा, पात्रों के हक पर सवालों का जवाब कब मिलेगा?*

कोरांव, प्रयागराज। गरीबों को पक्की छत देने के उद्देश्य से चलाई जा रही प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण यदि पात्रता और लाभार्थियों के चयन को लेकर सवालों में घिर जाए, तो जिम्मेदार व्यवस्था की जवाबदेही तय होना जरूरी है। प्रयागराज जनपद के विकासखंड कोरांव की ग्राम पंचायत बढ़वारी कलां में आवास योजना के अंतर्गत कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी सामने आने की बात कही जा रही है। पंचायत सचिव की भूमिका को लेकर विरोध जताए जाने और जिलाधिकारी के नाम संबोधित प्रार्थना पत्र में गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इस पूरी प्रक्रिया में क्या हुआ, किस स्तर पर हुआ और जवाबदेही किसकी बनती है? क्या गरीबों को आवास देने वाली योजना में लाभार्थियों के चयन का पूरा हिसाब सार्वजनिक होगा, या ग्रामीणों के सवालों का जवाब केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा? पहला बड़ा सवाल—लाभार्थियों के चयन में आखिर किसके फैसले पर लगी मुहर?जिलाधिकारी को संबोधित प्रार्थना पत्र में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत बढ़वारी कलां में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत लाभार्थियों के चयन में अनियमितताएं हुई हैं। आवेदन में कथित तौर पर अपात्र लोगों को लाभ दिए जाने और पात्र परिवारों के चयन पर सवाल उठाए गए हैं। यदि चयन प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई है, तो संबंधित विभाग लाभार्थियों की पात्रता और सत्यापन से जुड़े अभिलेखों के आधार पर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करे?लाभार्थियों का चयन किन मानकों पर किया गया? किसने पात्रता का सत्यापन किया? क्या मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति देखी गई?क्या पहले से पक्के मकान वाले परिवारों की स्थिति का नियमानुसार परीक्षण हुआ?आखिर गरीबों के हक से जुड़े इस मामले में प्रत्येक सवाल का जवाब अभिलेखों के आधार पर सामने आना चाहिए या नहीं? दूसरा बड़ा सवाल—पंचायत सचिव की भूमिका पर उठती उंगली, क्या सामने आएगा पूरा सच?ग्रामीणों की ओर से पंचायत सचिव की भूमिका को लेकर विरोध जताए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में पंचायत सचिव की जिम्मेदारियों और आवास आवंटन प्रक्रिया में उनकी वास्तविक भूमिका को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या लाभार्थियों के चयन और सत्यापन से संबंधित जिम्मेदारियों का नियमानुसार निर्वहन किया गया? क्या संबंधित अभिलेखों में दर्ज जानकारी और मौके की वास्तविक स्थिति एक-दूसरे से मेल खाती है? क्या शिकायत में उल्लिखित प्रत्येक बिंदु का जवाब संबंधित सचिव और विभागीय अधिकारियों से लिया जाएगा? यदि प्रक्रिया पारदर्शी थी, तो तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करने में परेशानी कैसी? और यदि किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदारी तय करने में देरी क्यों होनी चाहिए? हालांकि, किसी भी व्यक्ति को जांच और साक्ष्यों के बिना दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। तीसरा बड़ा सवाल—आवास के नाम पर जारी धनराशि का हुआ क्या?प्रार्थना पत्र में कुछ लाभार्थियों के आवास निर्माण और सरकारी धनराशि के उपयोग को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने निर्माण कार्य अधूरा रहने तथा कुछ मामलों में आवंटन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में संबंधित अभिलेखों के आधार पर यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि किन लाभार्थियों को कितनी धनराशि जारी हुई, निर्माण किस स्थिति में है और निर्धारित मानकों के अनुसार कार्य पूरा हुआ या नहीं। क्या स्वीकृत आवासों का वास्तविक स्थलीय सत्यापन कराया गया? क्या भुगतान और निर्माण की स्थिति का मिलान किया गया? यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है, तो वास्तविक स्थिति सामने लाने में देर क्यों? और यदि सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार वसूली और कार्रवाई की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? चौथा बड़ा सवाल—जिलाधिकारी के नाम प्रार्थना पत्र, अब प्रशासन की जवाबदेही कितनी?शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से उच्चस्तरीय दल गठित कर पूरे प्रकरण की पड़ताल कराने, दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध प्रशासनिक एवं विभागीय कार्रवाई करने तथा कथित अनियमितता से संबंधित सरकारी धनराशि की नियमानुसार वसूली कराने की मांग की है। अब सवाल जिला प्रशासन और संबंधित ग्राम्य विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर भी है। क्या शिकायत में उठाए गए प्रत्येक बिंदु पर तथ्यात्मक जवाब सामने आएगा? क्या लाभार्थियों की सूची, पात्रता के दस्तावेज, आवास निर्माण की स्थिति और धनराशि के भुगतान का मिलान होगा?क्या ग्रामीणों को यह जानकारी मिल सकेगी कि शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई? आखिर सरकारी योजना में पारदर्शिता की जिम्मेदारी किसकी है और शिकायत मिलने के बाद जवाबदेही सुनिश्चित करने का दायित्व कौन निभाएगा? पांचवां बड़ा सवाल—पात्र परिवारों को उनका अधिकार मिला या वे आज भी इंतजार में हैं?प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। यदि किसी पात्र परिवार को लाभ नहीं मिला और किसी अपात्र को लाभ दिए जाने का आरोप सही साबित होता है, तो यह योजना के उद्देश्य पर गंभीर सवाल खड़ा करेगा। लेकिन इसका निष्कर्ष केवल आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक पात्रता और संबंधित अभिलेखों के परीक्षण से ही निकाला जा सकता है। इसलिए प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि शिकायत में उठाए गए सवालों का तथ्यात्मक आधार क्या है और पात्र परिवारों के हितों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। *अब देखना यह है कि बढ़वारी कलां की शिकायत पर प्रशासन क्या कदम उठाता है। ग्रामीणों की नाराजगी, पंचायत सचिव की भूमिका को लेकर उठे सवाल और जिलाधिकारी के नाम दिए गए प्रार्थना पत्र के बीच सबसे अहम मांग यही है कि आवास योजना का पूरा हिसाब पारदर्शी तरीके से सामने आए। यदि कोई दोषी है, तो साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई हो; यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते, तो वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट की जाए। क्योंकि सवाल किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि गरीबों के लिए बनाई गई सरकारी योजना की विश्वसनीयता का है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासनिक कार्रवाई की स्थिति सामने आना बाकी है।

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