वैश्विक महामारी कोविड-19,कन्या भ्रूण हत्या से जन-जागरूकता ही बचाओ सदार पतविंदर सिंह

प्रदेश में समाज सेवा के क्षेत्र में सरदार पतविंदर सिंह प्रकाशमान स्तंभ बन चुके हैंl
नैनी प्रयागराज /सामाजिक कार्यकर्ता सरदार पतविंदर सिंह 30 वर्षों से निरंतर सामाजिक कार्य में लगे हुए हैं राष्ट्रीय एकीकरण,
पर्यावरण संरक्षण,बाल श्रम उन्मूलन,वैश्विक महामारी कोरोना कोविड-19 के लिए स्लोगनओं के साथ जनमानस में जन जागरूकता विभिन्न अनोखे रूप से करते रहते हैंl
सरदार पतविंदर सिंह ने आगे कहा कि शांति और सद्भावना का संदेश देना निहायत ही जरूरी है यदि हर कोई अपने घर में शांति से रहे तो मोहल्ले में अमन रहेगा और फिर धीरे-धीरे पूरा देश,पूरी दुनिया सकून से जी सकेगी मानव की कोई जाति,धर्म नहीं बल्कि राष्ट्र ही उसका जाति,धर्म उसकी पहचान हैl
मानवता से बढ़कर कोई धर्म नहीं बल्कि मानवता की जाति एक ही पहचान है सेवा के आदर्श को प्रेम के बीज बोना दुनिया में मदद करना, साथी हाथ बढ़ाना
समाजसेवी सरदार पतविंदर सिंह सभी संस्कृतियों,जातियों,मजहबो के लोगों तक पहुंचाना और जरूरतमंदों की मदद करने की छोटी सी इच्छा दिल में रहती है राष्ट्र,समाज की उन्नति में ईमानदारी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि नौजवानों को कल देश संभालना हैl नौजवानों की आंखों में उम्मीद की किरण देखता हूं युवा देश हित को सामने रखकर समाज में व्याप्त गलत बातों को समाप्त करने के बारे में विचार करें यदि युवा ही भटक गया तो आशा की किरण ही समाप्त हो जाएगी मेरी आशाएं देश के नौजवानों से है प्रत्येक नागरिक पूरी आजादी के साथ जीवन यापन करें लेकिन साथ ही प्रत्येक नागरिक अपने दायित्व में रहे तभी समाज प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा l
सरदार पतविंदर सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में भ्रष्टाचार,बेईमानी,हिंसा ना होना,गरीबों के अधिकारों का हनन ना करना आज यही बातें समाज में चुनौती के रूप में खड़ी हैं शांतिपूर्ण वातावरण में तनाव मुक्त मन ही सार्थक दिशा में कार्य करता है नौजवानों को चाहिए तनाव रहित रहकर,बुराई से दूर रहें यदि वे शराब, सिगरेट आदि पीने में व्यस्त रहेंगे तो उनका और देश के भविष्य का क्या होगाl
सरदार पतविंदर सिंह ने कहा कि हम महान विभूतियों की चर्चा तो करते हैं लेकिन जब उनके आदर्शों पर चलने की बात चलती है तो अगल-बगल झांकने लगते हैं आज समाज कहीं भटक रहा है आजादी के समय देशवासियों के मन में जो आदर्श की स्थिति की कल्पना थी आज भी अधूरी है हिंसा,विद्वेष संघर्ष का वातावरण है पर्यावरण प्रत्येक नागरिक स्मृतियों के रूप में सजोकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा की ओर अग्रसर होना होगा सर्वप्रथम शादी के शुभ अवसर पर, बच्चे के जन्म पर, मृत्यु के उपरांत पर्यावरण के प्रति शुरुआत अपने घर से करनी पड़ेगी समाज को जोड़कर,प्रकृति को सजोकर नहीं रखेंगे तो आने वाली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगीl प्रकृति से भौतिक की जगह आत्मिक नाता जोड़ना होगा l सामाजिक दर्द को अपना दर्द समझकर सब कुछ दिखा देना है इनके जीवन का लक्ष्य बन गया सीमित संसाधन इसके बाद भी अदम्य साहस का परिचय देते हुए प्रदेश में समाज सेवा के क्षेत्र में सरदार पतविंदर सिंह प्रकाशमान स्तंभ बन चुके हैं युवाओं के विकास के लिए युवा विकास कार्यक्रम संगोष्ठी,चौपाल का बराबर आयोजन कर युवाओं में सशक्त सामाजिक चेतना,नशा उन्मूलन एवं सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता व सामाजिक छवि सुधारने पर बल देते हैं वैश्विक महामारी कोविड-19 घातक संक्रामक बीमारी के खिलाफ जन जागरूकता कर लोगों को जागरूक कर रहे हैं l
