मैं दिया हूं अधेरे से लड़ता हुआ,
दीपावली शिल्प मेला के अंतर्गत कवि सम्मेलन व मुशायरे का आयोजन

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज (संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की स्वायत्तशासी संस्था) द्वारा आयोजित दिवाली शिल्प मेला के अंतर्गत कवि सम्मेलन मुशायरे का आयोजन शिल्प हाट केंद्र परिसर में रचनाकारों की बेहतरीन रचनाओं के साथ संपन्न हुआ।
केंद्र के अधिकारियों द्वारा रचनाकारों का सम्मान किया गया।
कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का संचालन प्रख्यात गीतकार शैलेंद्र मधुर ने किया। कवि सम्मेलन मुशायरा की अध्यक्षता देश के प्रख्यात रचनाकार साहित्यकार एटा से पधारे कवि डॉ ध्रुवेन्द्र भदोरिया जी ने किया।
कभी समय मुशायरे का शुभारंभ लखनऊ से पधारी कवियत्री पूनम मिश्रा ने वाणी वंदना के साथ किया।
उन्होंने पढ़ा,
“अब मेरे दिल के हमराज़ बन जाओ तुम,
मेरी पेश़ानी का ताज बन जाओ तुम,
प्रेम के गीत को हम जो मिल के गढ़े,
मैं जो आवाज़ दूँ साज़ बन जाओ तुम,”
तदउपरांत ग्वालियर मध्य प्रदेश से पधारे देश के नामचीन शायर अतुल अजनबी ने अपनी शायरी से श्रोताओं को आह्लादित कर डाला।
हमने जब ऐतबार किया सर्द रात पर
सूरज उदास हो गया इतनी सी बात पर
बड़े सलीक़े बड़ी सादगी से काम लिया
दिया जला के अंधेरों से इन्तक़ाम लिया
इसके पश्चात सिवान बिहार से पधारे हास्य व्यंग के प्रख्यात शायर डॉ सुनील कुमार सिंह जी ने अपनी पंक्तियों से श्रोताओं को भरपूर गुदगुदाया।
हम हैं ग़रीब फिर भी कहाँ छूट रहे हैं
जिनसे लिये थे क़र्ज़ हमें कूट रहे हैं
जो लोग लोन बैंक से लेकर हुए फ़रार,
लन्दन में ज़िन्दगी के मज़े लूट रहे हैं ।।
अध्यक्षता कर रहे वोट के प्रखर हस्ताक्षर डॉ ध्रुवेन्द्र भदौरिया जी ने अपनी पंक्तियों से प्रयागराज को रेखांकित करते हुए रचना प्रस्तुत की तो श्रोतागण भाव विभोर हो गए।
उन्होंने पढा, नीर भरी बदली सी मिट गई महादेवी
, मैं महीयसी के नैनो का नीर होना चाहता हूं ,
झीनी झीनी बीनी मिले मुझको भी चादर यदि,
तो राम की कसम मैं कबीर हूं ना चाहता हूं
रायबरेली से पधारे ओज के युवा हस्ताक्षर नीरज पांडे ने राष्ट्रीय पंक्तियों से युवाओं में जोश भर डाला।
तम को खतम करने के अभियान को ही ,
ध्यान में हमेशा रखकर के जिया हूँ मैं।
दिनमान के समान मैं नहीं महानता में
माटी का महज एक नन्हा सा दिया हूँ मैं।
प्रख्यात कवियत्री आभा श्रीवास्तव ने अपने गीतों अगर जनों से लोगों को मंत्रमुग्ध कर डाला,
मिटाने के लिए जुल्मों- सितम मैं,
कलम तलवार करना चाहती हूं,
दिया है आपने सम्मान मुझको,
प्रकट आभार करना चाहती हूं
लखनऊ से पधारे ओज के प्रख्यात हस्ताक्षर योगेश चौहान ने अपनी पंक्तियों से राष्ट्र को रेखांकित किया।
ताल ठोक कर चुनौती देने वालों के लिए, शीघ्र कब्र खोदने की है मेरी परंपरा।
बैरियों की छाती पे तिरंगा चक्र वाला चित्र, पूरा पूरा गोदने की है मेरी परंपरा।
संचालन कर रहे प्रख्यात गीतकार शैलेंद्र मधुर ने अपने गीतों और गजलों से लोगों का मन मोह लिया।
आंधियों की नजर में हूं चढ़ता हुआ ,
मैं दिया हूं अंधेरे से लड़ता हुआ,
जिस तक रास्ते पत्थरों से भरे,
उस तरफ पांव मेरा है बढ़ता हुआ।
हास्य व्यंग के चर्चित कवि अशोक सिंह बेशर्म ने अपनी कविताओं से लोगों को भरपूर हंसाया ।
विचार है ना कोई धारा है,
अपनी यही विचारधारा है
गीतकार जितेंद्र मिश्र जलज ने गीत प्रस्तुत किया,
अपना भारत यह रंगों से रंगा रहे
दीप पर जा लुटाता पतंगा रहे।
हास्य व्यंग के कवि नज़र इलाहाबादी ने अपनी रचनाओं से गुदगुदाया।
अगर मशहूर हो जाओ,तो तुम मशहूर ही रहना
अगर मगरूर हो जाओ,तो तुम मगरूर ही रहना।
रायबरेली से पधारे गीतकार डॉ पियूष मिश्रा ने अपने गीतों से लोगों को अलग किया।
