पांच दिवसीय कठघोड़वा प्रदर्शनी का हुआ समापन

कठघोड़वा प्रदर्शनी का मंगलवार को समापन हो गया। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज में कला प्रेमियों का आना-जाना दिनभर लगा रहा। इन चित्रों को देखने के बाद कला प्रेमी ठेठ भारत और उसकी संस्कृति से जुड़ कर और अपने बचपन में लौटकर रोमांचित होते रहे। चित्रों में प्रयुक्त उत्सव के रंग और आकारों को अपने जीवन और समाज से जोड़कर अपने को चित्रों के पात्र के रूप में खड़े होने की अनुभूति प्रेक्षकों को उसी तल पर उन्हें ले गई जो रचना का अभीष्ट था। आज अंबेडकर नगर नैनी, प्रतापगढ़, अयोध्या और आसपास के जिलों से खराब मौसम में भी कलाप्रेमी आते रहे और कलाकार के साथ संवाद करते रहे। संवाद करते हुए वरिष्ठ कलाकार अवधेश मिश्र ने अपनी पृष्ठभूमि, अपने जीवन, कला यात्रा और विषयों की प्रेरणा से लेकर संपूर्ण रचना प्रक्रिया पर बात की। अवधेश मिश्र ने बताया कि उधार विचारों से हम कुछ मौलिक नहीं रच सकते इसीलिए हमारी रचनाओं में हमारी अपनी संवेदना और तत्त्वों का होना आवश्यक है। मौलिक चिंतन और अपनी संवेदनाओं के जरिए ही रचनाकार रचनाप्रेमियों के दिलों में उतर सकता है। इस प्रदर्शनी के रंग, आकार और संवेदनाएं इसीलिए कला प्रेमियों के दिलों को छू रही हैं क्योंकि इस संयोजन में वे सब अपने को खड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं, इसे अपने जीवन के आसपास पा रहे हैं। अवधेश मिश्र ने कहा कि आज भारतवर्ष की विश्व में सशक्त स्थिति है। हमें अपनी संस्कृति और निजत्व को और उत्कृष्ट रूप में विश्व के सामने लाना है और इसके लिए अपनी युवा पीढ़ी को सक्षम और बौद्धिक रूप से समृद्ध बनाना है, जिसके लिए उन्हें हर प्रकार से अपनी सांस्कृतिक संवेदनाओं से जोड़े रखना है। हमें मौलिक चिंतन को महत्व देना है ।
