विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर विशेष,तंबाकू से मुक्ति ही स्वस्थ जीवन की युक्ति – डॉ जी एस तोमर

तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करने के प्रयासों को बढावा देने के लिए हर वर्ष 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है । इस वर्ष विश्व तम्बाकू निषेध दिवस का नारा (थीम) है- “हमें भोजन की आवश्यकता है, तम्बाकू की नहीं”।
इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए आयुर्वेद के ख्यातिलब्ध चिकित्सक प्रो.(डॉ.) जी एस तोमर ने बताया कि तंबाकू की खेती से भूमि एवं पर्यावरण को भी गंभीर क्षति हो रही है । दुनिया भर में सालाना 35 लाख हेक्टेयर भूमि का उपयोग तंबाकू की खेती के लिए किया जाता है।इसकी खेती के लिए वार्षिक वनों की कटाई का अनुमान लगभग 2 लाख हेक्टेयर है। इससे जमीन की उपजाऊ शक्ति भी कम होती है तथा मरुस्थलीकरण का विस्तार होता है। इसके अलावा तंबाकू के सेकन से वातावरण में अनेक हानिकारक पदार्थ पैदा होते हैं। इसके निर्माण, पैकेजिंग एवं परिवहन से भी पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ता है । यही नहीं तंबाकू के कारण हजारों टन जहरीले पदार्थ एवं ग्रीन हाउस गैसेस पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहीं हैं। तम्बाकू की खेती कृषि योग्य भूमि के पोषक तत्वों को हानि पहुचाती हैं। तथा इसके निर्माण से रसायनिक कचरा पैदा होता है । जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान होता है। यहाँ आश्चर्यजनक रूप से विरोधाभास यह है कि भारत में पर्यावरण मंत्रालय तंबाकू उद्योग को अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योग का दर्जा देता है तो वही बीड़ी उद्योग को कुटीर उद्योग का दर्जा मिला है ।ज्ञातव्य हो 3 सौ सिगरेट तैयार करने के लिए एक पेड़ काट दिया जाता है। भारत विश्व का दूसरा तंबाकू उत्पादक देश है यहां का वार्षिक उत्पादन 757.5 हजार मीट्रीक टन है। सेकंड हैंड (पैसिव) स्मोकिंग जिसमें व्यक्ति स्वयं धूम्रपन नहीं करता किन्तु उसके आसपास के
लोगों द्वारा धूम्रपान करने के कारण श्वांस के माध्यम से वे धूम्र ग्रहण करते हैं। सिगरेट व बीड़ी पौने वाले जो धुआं छोड़ते हैं उसमे सामान्य की अपेक्षा 3 गुना ज्यादा निकोटीन, 3 गुना टार एवं 50 गुना अमोनिया होता है। तम्बाकू एक धीमा जहर है, जो सेवन करने वाले व्यक्ति को धीरे धीरे मोत के मुँह में धकेलता रहता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार तंबाकू छेड़ने का निश्चय करने वालों में से केवल 30 प्रतिशत लोग ही तम्बाकू छोड़ने के उपाय
को अपनाने में सफल होते है। एक अनुमान के अनुसार पूरी दुनिया में प्रति 6 सेकंड पर एक व्यक्ति की मौत का कारण तंबाकू होता है।
भारत में तंवाकू सेवन करने वालों की संख्या लगभग 27 करोड़ है।
बच्चों में सेकंड हैंड स्मोकिंग के
कारण दिल का दौरा पड़ने व स्ट्रोक का खतरा बहुत अधिक रहता है। इससे महिलाओं में बाँझपन का भी खतरा बढ़ जाता है। एक अनुमान के अनुसार भारत में 50 प्रतिशत लोग
सेकड हैंड स्मोकिंग के शिकार होते हैं।तंबाकू के सामान्य दुष्प्रभावों में नेत्र रोग, आतों में सूजन, उच्च रक्तचाप, दमा, मुँह का कैंसर, बाँझपन, डायबिटीज, डिप्रेशन
एवं फेफड़ों का कैंसर मुख्य हैं ।
प्राप्त आँकड़ों के अनुसार पूर्वांचल में निरन्तर बढ़ रहे कैंसर रोगियों में से लगभग 28.39% रोगी मुख एवं सिर के कैंसर के हैं अर्थात् हर तीन कैंसर रोगियों में से एक रोगी मुख कैंसर से पीड़ित है । जिसका मुख्य कारण पान मसाला, खैनी, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट आदि के रूप में तम्बाकू सेवन ही है । आज के दिन हमें जनता को जागरूक करना है कि वे इस हानिकारक लत से अपने आपको बचाने के लिए आज ही इसे छोड़ने का संकल्प लें । डॉ तोमर ने 250 व्यक्तियों पर किए गए अपने एक शोध अध्ययन का हवाला देते हुए यह बताया कि पानमसाला एवं गुटखा की लत को छुड़ाने के लिए उन्होंने कुछ मुख शोधक आयुर्वेदीय औषधियों को मिलाकर एक ऐसा मिश्रण तैयार किया जिसका प्रयोग तम्बाकू युक्त विभिन्न उत्पादों के सेवन की इच्छा होने पर कराया गया । दृढ़ इच्छा शक्ति वाले लगभग 60% व्यक्तियों को इस वैकल्पिक मिश्रण के प्रयोग से औसतन 1 माह में तम्बाकू के व्यसन से मुक्ति दिलाई जा सकी । 25% व्यक्तियों ने पहले माह के प्रयोग के दौरान तम्बाकू सेवन बंद तो किया लेकिन बाद में संकलित आँकड़ों में मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने फिर से तम्बाकू सेवन प्रारम्भ कर दिया । 15% व्यक्ति एक से तीन सप्ताह तक ही इसका प्रयोग किए बाद में इस अध्ययन में सम्मिलित नहीं रहे । यह तथ्य इस बात की तरफ़ इंगित करता हैं कि तम्बाकू की लत एक मनोवैज्ञानिक लत है, इसके छोड़ने से समय समय पर मात्र इसके सेवन की इच्छा अवश्य होती है । लेकिन छोड़ने पर मद्य एवं अफ़ीम की तरह कोई शारीरिक लक्षण उत्पन्न नहीं होते हैं । प्रस्तुत शोध अध्ययन में प्रयुक्त मिश्रण में निम्न औंषधियाँ मिश्रित की गईं ।
छोटी इलायची एक भाग
दालचीनी एक भाग
लोंग एक भाग
बड़ी इलायची एक भाग
छोटी पिप्पली एक भाग
काली मिर्च एक भाग
सुपारी दो भाग
सोंफ दो भाग
धनियाँ बीज। दो भाग
उपर्युक्त सभी द्रव्यों को मिलाकर मोटा चूर्ण बनाकर रखें तथा दिन में एक या दो बार ही 2 से 3 ग्राम की मात्रा में भोजन के बाद सेवन करें । इससे न केवल तम्बाकू की जानलेवा लत से ही मुक्ति मिलेगी, अपितु व्यक्ति की पाचन क्रिया में अभूतपूर्व सुधार होकर गैस सम्बन्धी तकलीफ़ में भी आराम मिलेगा तथा क़ब्ज़ की समस्या भी दूर हो सकेंगी ।
