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साहित्य समाज का आईना ही नहीं बल्कि दीपक और दृष्टि भी है: डॉ. राम लखन

साहित्य समाज का आईना ही नहीं बल्कि दीपक और दृष्टि भी है: डॉ. राम लखन

डॉ. राम लखन चौरसिया ‘वागीश’ की पुस्तक ‘नूतन साहित्य की अवधारणा’ का हुआ लोकार्पण,साहित्य समाज का आईना ही नहीं बल्कि दीपक और दृष्टि भी है, साहित्यकार अपनी कल्पना शक्ति एवं दूरदृष्टि से समाज को अवगत कराता है। संपूर्ण संसार के रक्षार्थ की गई रचना ही साहित्य है।जो निज के घेराबंदी से बाहर निकल कर ही संभव है।

उक्त बातें डॉ. राम लखन चौरसिया ‘वागीश’ ने भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के 24 वां स्थापना दिवस समारोह में अपनी पुस्तक ‘नूतन साहित्य की अवधारणा’ के लोकार्पण के मौके पर कहीं।
अलोपी बाग स्थित महाराष्ट्र मंडल के भव्य सभागार में आयोजित हुआ।
मुख्य अतिथि डॉ. शंभू नाथ त्रिपाठी ‘अंशु’ ने कहा साहित्य मंगल कामना हेतु लिखा जाता अमंगलकारी शब्द साहित्य में स्वीकार नहीं है। अति विशिष्ट अतिथि मुनेश्वर मिश्रा ने कहा डॉ चौरसिया का विद्रोही स्वभाव की झलक उनके साहित्य में भी देखने को मिलती है।
भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के 24 वें स्थापना दिवस समारोह में जुटे लेखक, साहित्यकार पत्रकार एवं कवि बंधु,’सजा तो तय है मेरी, सच बोलने की ख़ता की है मैंने’: बटोही,कवि एवं कवयित्रियों ने किया सुंदर काव्य पाठ, भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के स्थापना दिवस समारोह में डाँ भगवान प्रसाद उपाध्याय पर केंद्रित शहर समता के केंद्रित विशेषांक, पत्रिका ‘साहित्यांजलि प्रभा’ का जुलाई अंक एवं डॉ. राम लखन चौरसिया ‘वागीश’ की पुस्तक ‘नूतन साहित्य की अवधारणा’ का लोकार्पण किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रभा शंकर ओझा, मुख्य अतिथि, शंभू नाथ त्रिपाठी ‘अंशुल’ अति विशिष्ट अतिथि मुनेश्वर मिश्र, विशिष्ट अतिथि, डाँ प्रदीप चित्रांशीं, प्रोफेसर अग्निहोत्री एवं जन कवि प्रकाश ने संबोधित किया।
समारोह का शुभारंभ रचना सक्सेना की वाणी वंदना से हुआ। संचालन उमेश श्रीवास्तव एवं कार्यक्रम संयोजक डाॅ भगवान प्रसाद उपाध्याय नें किया।
समारोह में संगठन के वरिष्ठ सहयोगियों को विशिष्ट सम्मान से नवाजा गया।
इस मौके पर एक सरस काव्य गोष्ठी भी हुई, जिसमें मुख्य रूप डॉ. भगवान प्रसाद उपाध्याय, जनकवि प्रकाश, उमेश श्रीवास्तव डॉ. राम लखन चौरसिया तलत महमूद, पंकज गुप्ता, विकास केलकर आदि कवि एवं कवयित्रियों ने अपनी-अपनी रचनाएं पढ़ी ।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में लेखक, साहित्यकार पत्रकार, कवि बंधु एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।

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