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इस्कॉन के द्वारा भक्ति वेदांत सांस्कृतिक केंद्र के लिए भूमि पूजन यज्ञ का हुआ आयोजन

इस्कॉन के द्वारा भक्ति वेदांत सांस्कृतिक केंद्र के लिए भूमि पूजन यज्ञ का हुआ आयोजन

प्रयागराज ज्ञान की भूमि है -अच्युत मोहन प्रभु,
इस्कॉन ने विश्व के कोने-कोने तक सनातन धर्म का वैभव स्थापित किया – महापौर गणेश केसरवानी
28 अगस्त प्रयागराज ,श्रील रूप गोस्वामी के तिरोभाव के अवसर इस्कॉन प्रयागराज के बलुआघाट स्थित भक्ति वेदांत सांस्कृतिक केंद्र के जीर्णोद्धार की आधारशिला भूमि पूजन एवं यज्ञ आयोजित की गई
कार्यक्रम श्री श्री राधा वेणीमाधव जी एवं इस्कॉन के संस्थापकाचार्य श्रील प्रभुपाद जी की आरती से प्रारंभ हुआ ।
इस्कॉन के अंतरराष्ट्रीय पुरोहित श्रीमान नीलांबर प्रभु जी के द्वारा विशेष यज्ञ का आयोजन किया गया जिसमें इस मंदिर से जुड़े 54 परिवार यजमान रहे । यज्ञ में 5 वेदियां बनाई गई थीं एवं अनंत शेष को नीव में स्थापित कर भूमि पूजन संपन्न किया गया। इस अवसर पर
इस्कॉन प्रयागराज के अध्यक्ष श्रीमान अच्युत मोहन प्रभु ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रयागराज श्रील रूप गोस्वामी की ज्ञान भूमि है, जहां उन्हें श्री चैतन्य महाप्रभु से ज्ञान की प्राप्ति हुई। फिर उन्होंने मंदिर के वरिष्ठ भक्तों और दानदाताओं को धन्यवाद दिया जिन्होंने मंदिर के नए निर्माण में मदद की है। उन्होंने वैदिक भारत की संस्कृति के प्रसार में मदद के लिए आदरणीय मुख्य मंत्री और आदरणीय प्रधानमंत्री को भी धन्यवाद दिया।
इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महापौर गणेश केसरवानी ने कहा कि इस्कॉन के माध्यम से दुनिया भर में पूज्यपाद प्रभुपाद जी महाराज ने कृष्ण भक्ति की राह पर चलकर भारत की सनातन धर्म का गौरव स्थापित किया है जो हर एक भारतीय के लिए गर्व का विषय है उन्होंने आगे कहा कुंभ के मेले में इस्कॉन से बड़ी संख्या में भक्त प्रयागराज आते हैं उनके लिए मंदिर के निर्माण में सरकार से वार्ता करते हुए जितनी मदद हो सकती है मैं करूंगा
इसके पश्चात करछना के विधायक माननीय श्री पीयूष रंजन जी बताया की इस्कॉन संस्था गीता के ज्ञान और हमारे संस्कृति को एक नई ऊंचाई तक ले कर जा रहा है,
इस अवसर पर
इस्कॉन इंडिया ब्यूरो के उपाध्यक्ष एवं जोनल सेक्रेटरी देवकीनंदन प्रभु ने कहा कि श्रील प्रभुपाद जी ने इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य भागवत सन्देश के आधार पर आध्यात्मिक शिक्षा का वितरण करना है जिससे एक उत्तम मनुष्य समाज की रचना हो सकेगी जो चरित्र में राजहंस के सामान निर्मल हों। भगवान् की इच्छा तो पूरी होगी ही लेकिन अगर हम इससे जुड़ेंगे तो हमारा जीवन सफल हो जायेगा अतः जो लोग इस केंद्र को बनाने में सहयोग करेंगे वे अपने नाम को शाश्वत रूप से भगवान की सेवा से जोड़ देंगे।
इस्कॉन प्रयागराज और वाराणसी के अध्यक्ष अच्युत मोहन प्रभु ने वैदिक भारतीय संस्कृतिक केंद्र की विशेषताओं के बारे में बताया। यह केंद्र समाज के प्रत्येक वर्ग के समुचित विकास के लिए समर्पित रहेगा ।

इसमें 11 अंग रहेंगे –
1) भक्तिवेदांत विद्यापीठ – वैदिक शास्त्रों के अध्ययन एवं शिक्षा के लिए
2) स्वर ब्रह्म – शास्त्रीय संगीत एवं कीर्तन में प्रशिक्षण के लिए
3) नृत्य वाटिका – नाट्यशास्त्र, नृत्य नाटक में प्रशिक्षण के लिए
4) कला निकेतन – ललित कला, पेंटिंग क्राफ्ट्स में प्रशिक्षण एवं इस क्षेत्र में कार्यरत कलाकारों को अवसर देने के लिए
5) भोजशाला – सात्विक कुकिंग में प्रशिक्षण के लिए
6) संस्कृति अकादमी – 5 – 13 उम्र के युवाओं को नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों में प्रशिक्षण और शिक्षा देने के लिए
7) विद्याश्रम – अध्यात्मिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण, उम्र 14 – 18 के युवाओं के लिए
8) धर्म केंद्र – वैदिक पद्धति के अनुसार विभिन्न पूजा विधियों में पुजारी प्रशिक्षण के लिए
9) युवा क्षेत्र – शैक्षिक, कौशल एवं आध्यात्मिक प्रशिक्षण, उम्र 18 से अधिक के युवाओं के लिए
10) विदुर संग – वरिष्ठ जनों को आध्यात्मिक सत्संग प्रदान करने के लिए
11) वैष्णवी संग – युवतियों एवं ग्रहणियों को आध्यात्मिक सत्संग प्रदान करने के लिए।
इस प्रकार यह केंद्र सत्कार, युवा प्रचार, संस्कृति व उत्सव, ग्रामीण विकास, शास्त्रिक शिक्षा, अन्नदान के क्षेत्र में कार्यरत रहेगा।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय प्रभारी श्रीमान देवकीनंदन प्रभु, प. पू. भक्ति प्रचार परिव्राजक स्वामी महाराज,श्रीमान अद्वैत आचार्य प्रभु, श्रीमान अच्युत मोहन प्रभु, भक्त धवल पटेल, श्रीमान बी बी गोयल मीडिया प्रभारी राजेश केसरवानी पार्षद नीरज गुप्ता विवेक अग्रवाल मनीष केसरवानी आदि इस्कॉन मंदिर के सैकड़ो भक्त गण उपस्थित रहे ।
कार्यक्रम का समापन प्रसाद वितरण व भंडारे से किया गया।

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