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ज्ञानवापी मामले में न्यायालय के फैसले का स्वागत करे मुस्लिम समाज-शंकराचार्य अधोक्षजानंद

ज्ञानवापी मामले में न्यायालय के फैसले का स्वागत करे मुस्लिम समाज-शंकराचार्य अधोक्षजानंद

व्यासजी के तहखाने में पूजा होना समाज के लिए होगा मंगलकारी
प्रयागराज। पूर्वाम्नाय गोवर्धन मठ पुरी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने ज्ञानवापी मामले में वाराणसी के जिला न्यायाधीश के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंनें कहा कि न्यायालय के फैसले से एक बार फिर सत्य की जीत हुई है। अब वहां ंनियमित पूजा होगी, जिसकी शुरुआत गुरुवार भोर में हो गयी। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष को इसका स्वागत करना चाहिए, जिससे समाज में शांति एवं भाईचारा कायम रहे। शंकराचार्य न्यायालय का फैसला आने के बाद माध मेला क्षेत्र में उस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे।
शंकराचार्य अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने कहा कि यह खुशी की बात है कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के भीतर तहखाने में शांति पूर्वक पूजा शुरू हो गयी है। इस स्थान पर तीस साल के बाद पूजा शुरू हुई है। यहां वर्ष 1993 में सरकार द्वारा राजनीतिक कारणों से पूजा रोक दी गयी थी। इस हिस्से को व्यासजी का तहखाना कहा जाता है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाये कि वहां अब पूजा में कोई व्यवधान न आये। वहां पूजा होना देश और समाज के लिये मंगलकारी होगा। यह देश-विदेश के करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं से जुड़ा मामला है।
शंकराचार्य ने कहा कि भारत में मुस्लिम समाज सदियों से शांति एवं भाईचारे के साथ रहता आया है। उन्हें खुले दिल से न्यायालय के इस फैसले का स्वागत करना चाहिए। साथ ही आगे बढ़कर ज्ञानवापी को हिंदूओं को सौंप देना चाहिए। इससे समाज के सभी वर्ग के लोगों में शांति एवं भाईचारे की भावना और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि काशी स्थित भगवान शिव का मंदिर हिंदुओं के लिए आस्था का केंद्र है। इस भावना को मुस्लिम समाज को समझना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि न्यायालय का फैसला दोनों वर्ग के लोगों का स्वीकार्य होगा।

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