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महाकुंभ: युद्ध के समय में शांति, धैर्य और एकता का संदेश…

 

महाकुंभ: युद्ध के समय में
शांति, धैर्य और एकता का संदेश…

जब पूरी दुनिया युद्ध, संघर्ष और सत्ता के लोभ में उलझी हुई है, ऐसे समय में राकेश शुक्ल ने 28 जून को ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी यूनियन (यूके) में अपने भाषण में महाकुंभ की महत्ता को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ इंसानियत और आशा की उस रौशनी को जीवित रखता है, जो इस विश्वास के साथ जलती रहती है कि विश्व में एकता का दीपक कभी बुझने न पाए। जब देश अपने-अपने स्वार्थ और विस्तार की होड़ में लगे हों, तब महाकुंभ पूरे मानव समाज को जोड़ने का कार्य करता है और उनके दिलों में शांति और आशा का संचार करता है।

श्री शुक्ल का यह व्याख्यान इंडियन ग्लोबल फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया था, जहाँ उन्होंने बताया कि हर 12 वर्षों में आयोजित होने वाला महाकुंभ करोड़ों श्रद्धालुओं को एक साथ जोड़ता है। यह एक ऐसा आयोजन है, जहाँ न भाषा का भेद होता है, न वेशभूषा का। वहाँ अमीर-ग़रीब, वृद्ध-युवा सभी एक समान त्रिवेणी संगम की पावन धारा में स्नान कर आत्मिक शांति का अनुभव करते हैं। एक पल का स्नान जीवनभर की शांति का एहसास कराता है।

श्री शुक्ल के अनुसार महाकुंभ 2025 आस्था और आधुनिकता का एक सजीव संगम बन गया.जहाँ AI आधारित ‘कुंभ सहायक’ ने मार्गदर्शन किया,वही नेत्र कुंभ ने लाखों आंखों में रौशनी भरी। सुरक्षित और सुव्यवस्थित महाकुंभ ने सार्वजनिक आयोजन प्रबंधन का एक नया वैश्विक मानक स्थापित किया।

वैदिक संस्कृति की केन्द्रीय धारणा
मानव जीवन को अमरत्व की ओर ले जाना है और शाश्वत सत्य के सनातन धर्म के द्वारा ही वैश्विक शांति का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है…उन्होंने 28 जून को यह संदेश उस ऐतिहासिक मंच से दिया, जहाँ कभी विंस्टन चर्चिल, मार्गरेट थैचर, रोनाल्ड रीगन, डॉ. शशि थरूर, ममता बनर्जी, जावेद अख़्तर और अनुपम खेर जैसे महान व्यक्तित्व अपने विचार रख चुके हैं। अब पहली बार, प्रयागराज की आवाज़ उस वैश्विक मंच पर गूंजी। उनके शब्दों में “वसुधैव कुटुंबकम” की वह गूंज थी, जिसे पूरी दुनिया ने सुना।

श्री शुक्ल के शब्दों ने वहाँ उपस्थित हर व्यक्ति को यह महसूस कराया कि महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि “वसुधैव कुटुंबकम” की सजीव भावना है—एक ऐसा दीपक, जो आज के अंधकारमय समय में भी संपूर्ण विश्व को प्रकाशित कर सकता है।सनातन के सूर्य का आलोक और उजास पूरी दुनिया में विकरित हो रहा है.ये सनातन के सूर्य का पुनः पुनरोदय है और इस उदय को हमारी नयी पीढ़ी पूरी दुनिया में लेकर आगे जाएगी.

ऑक्सफोर्ड दुनिया के शीर्ष शोध विश्वविद्यालयों में से एक है और अध्ययन और शोध के लिए विश्व स्तरीय सुविधाओं का दावा करता है। अपने शोध उत्कृष्टता और नवाचार के लिए प्रसिद्ध हैं.

कार्यक्रम में मुख्य रूप से सुरेश मिश्रा जी, रॉबर्ट डेविस, बैरेनस सैनडी वर्मा,सांसद महुआ मांझी, सांसद- वीरेन्द्र शर्मा जी,डॉक्टर केशव सिघल जी,सहित दुनिया के तमाम गणमान्य लोग उपस्थित रहे. संयोजन सौम्यता द्वारा किया गया.

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