राजराजेश्वरी जगतमाता खेमामाई नवदुर्गा भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं ——–डाक्टर हरिश्चंद्र मालवीय

प्रयागराज तीर्थराज प्रयाग के हृदय पटल चौक गंगादास खुशहाल पर्वत में स्थित भक्तों की आस्था का केंद्र अति प्राचीन खेमा माई नवदुर्गा मंदिर अपनी दिव्यता भव्यता प्राचीनता एवं आलौकिक शक्ति केन्द्र के कारण सुप्रसिद्ध है। खेमा माई नवदुर्गा मंदिर में माता नवदुर्गा का अत्यन्त दुर्लभ दिव्य मूर्ति जो कदाचित प्रयाग प्रदेश एवं देश में इस स्वरुप में दर्शित शाय़द कहीं हो। राजराजेश्वरी जगतमाता खेमामाई नवदुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं, भक्तों एवं साधकों को अपार शांति एवं उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। जगतमाता खेमामाई नवदुर्गा अत्यन्त प्राचीन नीम के पेड़ के नीचे बिराजमान है एवं बगल में मंगल मूर्ति भगवान गणेश जी महाराज विराजमान हैं। प्रातः काल एवं सायंकाल मातारानी की महाआरती होती है। नवरात्रि के पावन पुनीत पर्व पर माता रानी का नव दिन दिव्य श्रृंगार प्रसाद वितरण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। खेमा माई नवदुर्गा मंदिर की प्राचीनता का अध्ययन करने हेतु शोध वैज्ञानिकों एवं अनुसंधानकर्ताओं की एक उच्च स्तरीय समिति मंदिर में आकर मूर्ति की प्राचीनता का विश्लेषण एवं मूल्यांकन किया एवं बताया कि माता खेमा माई नवदुर्गा की मूर्ति लगभग छह-सात सौ वर्षों से अधिक प्राचीन है। यह कहा जाता है कि विगत दो सौ वर्षों में यमुना अतरसुइया सत्तीचौरा के आस पास बहती थी। राजराजेश्वरी जगतमाता खेमामाई नवदुर्गा का मंदिर उस समय यमुना जी के किनारे स्थित था। कालान्तर में यह मंदिर प्रयाग के ह्रदय पटल चौक गंगादास खुशहाल पर्वत पर स्थित है जो अतरसुइया सत्तीचौरा के समीप है। किदवंती कथा के अनुसार ऋषि अत्रि एवं माता अनसुइया प्रयाग में आकर माता रानी के दर्शनार्थ इसी स्थान पर रुके थे जिसके बाद इसका नाम अतरसुइया पड़ा।
राजराजेश्वरी जगतमाता खेमामाई नवदुर्गा मंदिर में पंडित मदन मोहन मालवीय, राजर्षि पुरुषोत्तमदास टंडन, छुन्नन गुरु, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रहे बी एन खरे श्री हरिप्रसाद चौरसिया पंडित गोपाल दत्त शास्त्री एवं अन्य बहुत से महापुरुष आकर माता रानी के दर्शन करके स्वयं को कृतार्थ किया।
खेमा माई नवदुर्गा मंदिर के प्रबन्धनार्थ एक समिति खेमा माई नवदुर्गा समिति का गठन किया गया है। इस समिति का मुख्य उद्देश्य मंदिर के उन्नयन हेतु रचनात्मक भूमिका का निर्वाहन करना है। खेमा माई नवदुर्गा मंदिर के समग्र विकास एवं विस्तार के लिए वित्त एवं जन सहयोग आवश्यक है। क्षेत्रीय जनमानस के रचनात्मक आर्थिक समाजिक सहयोग एवं स्थानीय प्रशासन की सहभागिता अपेक्षित है। क्षेत्रीय पार्षद एवं मंदिर समिति की संयोजिका के अथक प्रयास से मंदिर क्षेत्र का नाम बदलकर खेमामाई नवदुर्गा मार्ग घोषित किया गया है।
