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न्यायिक विरासत को सरंक्षित करने का सशक्त साधन है ई पुस्तिका= न्यायमूर्ति अजित कुमार

न्यायिक विरासत को सरंक्षित करने का सशक्त साधन है ई पुस्तिका= न्यायमूर्ति अजित कुमार

 

ई पुस्तिका स्वरूप में ऐतिहासिक निर्णय के द्वितीय अंक का हुआ विमोचन

न्यायमूर्ति अजित कुमार, न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी, न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान, न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा रहे शामिल

विधि संवाददाता
प्रयागराज। ई पुस्तिका स्वरूप में ऐतिहासिक निर्णय के द्वितीय अंक में ऐतिहासिक केशव सिंह बनाम विधानसभा अध्यक्ष से संबंधित विशेष संदर्भ संख्या एक सन 1964 में पारित उच्चतम न्यायालय के निर्णय 30 सितम्बर 1964 के हिन्दी अनुवाद पर आधारित ई पुस्तिका का विमोचन एआई असिस्टेड लीगल ट्रांसलेशन एडवाइजरी, ई एएचसीआर एवं आईएलआर समिति द्वारा किया गया। इसके पूर्व इस श्रृंखला के प्रथम अंक में ऐतिहासिक मुकदमा चौरी चौरा का प्रकाशन किया गया था। यह ई पुस्तिका मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली के संरक्षण एवं एआई असिस्टेड लीगल ट्रांसलेशन एडवाइजरी, ई एएचसीआर एवं आईएलआर समिति के मार्गदर्शन में सुवास प्रकोष्ठ द्वारा प्रकाशित की जा रही है। ई पुस्तिका स्वरूप में ऐतिहासिक निर्णय की यह श्रृंखला विधिक शोधकर्ताओं, अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों एवं विधि वि‌द्यार्थियों के लिए अमूल्य सामग्री सिद्ध होगी। यह ‌द्वितीय अंक केशव सिंह प्रकरण भारतीय संविधान के इतिहास में एक मील का पत्थर है जो विधायी विशेषाधिकार और न्यायिक समीक्षा के बीच सीमाओं को परिभाषित करता है। यह ई पुस्तिका आम जनमानस के लिए ज्ञानार्जन का एक महत्वपूर्ण साधन बनेगी।समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अजित कुमार, सदस्य न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी, न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान एवं न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने पत्रिका के संपादक संयुक्त निबंधक विवेक श्रीवास्तव एवं सुवास प्रकोष्ठ के सदस्यों को दूसरे अंक को सफलतापूर्वक प्रकाशित करने के लिए बधाई दी। समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अजित कुमार ने मुख्य न्यायमूर्ति एवं समिति के अन्य सदस्य के लिए कहा कि पुस्तक का प्रकाशन हिंदी में विधिक जानकारी प्रदान करने के लिए किया गया है। जो इतिहास में गहरी अंतर्दृष्टि के साथ साथ न्यायिक विरासत को सरंक्षित करने का एक सशक्त साधन बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह ई पुस्तिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर मुफ्त उपलब्ध होगी। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा कि इस पुस्तिका का उद्देश्य ज्ञान को लोकतांत्रिक बनाना और अपनी समृद्ध न्यायिक विरासत को पाठकों के लिए सरलता से उपलब्ध कराना है। न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान ने कहा कि यह विमोचन न केवल प्रकाशन को सशक्त बनाने का प्रयास है, अपितु न्याय तक पहुँच को सरल, सुलभ और व्यापक बनाने की दिशा में एक प्रशंसनीय कदम भी है।
न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि यह अत्यंत गर्व का क्षण है कि आज हम भारतीय संवैधानिक इतिहास के अत्यंत महत्वपूर्ण प्रकरण केशव सिंह बनाम विधानसभा अध्यक्ष में पारित उच्चतम न्यायालय के निर्णय के हिंदी अनुवाद पर आधारित ई पुस्तिका विधिक ज्ञान के विस्तार का एक सशक्त साधन बनेगी। संपादक और संयुक्त निबंधक विवेक श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की सफलता का श्रेय पैनल के सदस्यों विनोद कुमार त्रिपाठी, डॉ अनुपम श्रीवास्तव, मनीष कुमार सिंह, अतुल सागर, शालिनी सिंह और सुवास प्रकोष्ठ के सदस्यों को दिया। इस मौके पर एचजेएस पवन कुमार शर्मा, मुख्य संपादक एचजेएस अरविंद वर्मा, संपादक विवेक श्रीवास्तव, उप-संपादक विनोद कुमार त्रिपाठी, सह संपादक डॉ अनुपम श्रीवास्तव आदि रहे।

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