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जिम्मेदारियों से हटकर भजन में लगाना चाहिए मन= शांतनु महाराज,सलोरी में श्रीराम कथा का पांचवां दिन

जिम्मेदारियों से हटकर भजन में लगाना चाहिए मन= शांतनु महाराज,सलोरी में श्रीराम कथा का पांचवां दिन


प्रयागराज। सलोरी काटजू बाग कालोनी स्थित दुर्गा पूजा पार्क में भईया जी का दाल भात परिवार और श्री सुमंगलम सेवा न्यास की ओर से सेवा कार्यों के सहयोगार्थ आयोजित हो रही नौ दिवसीय संगीतमय श्री रामकथा के पांचवें दिन गुरुवार को कथा व्यास आचार्य शांतनु महाराज ने अयोध्या कांड की पावन मांगलिक प्रारंभिक चौपाइयों के गायन के साथ प्रारंभ किया। एक माह के बाद जनकपुर से लौटकर श्रीधाम अयोध्या और अयोध्या की स्थिति एकदम परिवर्तित हो चुकी है। रिद्धि सिद्धि समृद्धि की बाढ़ आ गई। एक माह के बाद राज्यसभा जा बैठी तो महाराज ने भरी सभा में शीशा देखा महाराज श्री ने शीशा देखने के तात्पर्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि सही व्यक्ति का गुरु भी है दुश्मन भी है इसलिए शीशा जरूर देखना चाहिए। स्वयं के देखने से गुरु का काम करता है यदि दूसरा दिखाएं तो दुश्मन का काम करता है। शीशा देखने का अर्थ आत्मावलोकन आत्मचिंतन आत्मदर्शन आत्म संवाद से है। जब महाराज को सफेद बाल कान के दिखाई पड़े तो उन्होंने राज्य राम को सौंपने का मन बनाया ऐसे ही संकेत मिलता है चौथा बना जाए तो मनुष्य को धीरे धीरे जिम्मेदारियों से हटकर भजन में मन लगाना चाहिए। राज्याभिषेक की तैयारियां हो रही थी और देवता विघ्न की रचना कर रहे थे सरस्वती जी ने मंथरा की बुद्धि बिगाड़ी है और मंथरा ने पूरा को सत्यानाश कर दिया। महाराज जी ने मंथरा के बारे में बताते हुए कहा कि मंथरा कुसंग है और साथ ही दहेज का सामान इन दोनों से बचना ही चाहिए कुसंग का जल बहुत भयानक होता है इसकी अवधि किसी के पास में होते और कुसंग को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए वरदान के प्रसंग को सुनाते हुए महाराज श्री ने कहा मां के के भगवान के वनवास का वरदान मांगा इस बात को महाराज दशरथ बर्दाश्त नहीं कर पाया बहुत उलाहना भी दी है विनती भी की है लेकिन कैकेई ने एक नहीं सुना इसी कारण से कुसंग से बचना ही चाहिए भगवान को वनवास की सूचना प्राप्त हुई और मां कौशल्या से आशीर्वाद लेकर चले राष्ट्र संघ में कहा इस देश की माताओं की छाती में वह शक्ति है और क्षमता है वह पराक्रम है सहनशीलता है जो इस देश की धर्म संस्कृति परंपराओं को जीवित रखी है कौशल्या माने एक प्रकार से पारिवारिक एकता का संकेत किया है कि मां के प्रति भगवान राम को भड़काया नहीं अपितु मां का दर्जा दिया है और मां और पिता यदि दोनों की आज्ञा तो तुझे जाना चाहिए लक्ष्मण जी को बहुत समझाने के बाद भी लक्ष्मण जी जब नहीं माने तो लक्ष्मण भगवान और जान की तीनों वन के लिए चले यह है रघुवंश का भ्रातृ प्रेम जिस कारण से आज भी हम सब ऐसे भाइयों को याद करके आनंदित होते हैं। मुख्य यजमान नवीन शुक्ला रहे। भोग प्रसाद वितरण हरिशंकर अग्रवाल पप्पू भैया और डॉ अजय शुक्ला की ओर से रहा। कथा के दौरान उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एल के शुक्ला, कुलपति जयपुर प्रो रामसेवक दुबे, सांसद फूलपुर प्रवीण पटेल, पूर्व विधायक उदयभान करवरिया, देवी शरण लाल श्रीवास्तव, ऊषा श्रीवास्तव, एसीपी कानून व्यवस्था विनीत सिंह, राजेश सिंह, राजू शुक्ला, संजय श्रीवास्तव, राकेश पाण्डेय, पवन उपाध्याय, जयनाथ पांडेय, राजेश त्रिपाठी, अखिलेश मिश्रा आदि उपस्थित रहे।

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