महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर में ‘कभी हार न मानो’ विषय पर स्वामी अभेदानंद जी के व्याख्यान सत्र का आयोजन

प्रयागराज वर्तमान समय प्रतिस्पर्धाओं एवं चुनौतियों से भरा युग है।प्रत्येक व्यक्ति एक दूसरे से आगे बढ़ने के स्वप्न को संजोए हुए अपने श्रेष्ठतम प्रदर्शन में लगा हुआ है, किंतु सही मार्गदर्शन एवं आत्मविश्वास में कमी के कारण एक भी असफलता मिलने पर वह उसे स्वीकार नहीं कर पाता और स्वयं को दोषी मानकर हारने लगता है और इसी को अपने जीवन की इतिश्री मान बैठता है, जो अत्यंत घातक स्थिति है, जिससे उबरने के लिए यह आवश्यक है कि धैर्य एवं आत्मविश्वास के साथ निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।
इसी को केंद्र में रखकर अपार ऊर्जा एवं सकारात्मक भाव से युक्त ‘कभी न हार मानो’ विषय पर कक्षा 11 के विद्यार्थियों के लिए आज दिनांक 7 नवंबर 2025 को महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर परिसर में स्थित ‘रमन सभागार’ में एक व्याख्यान सत्र का आयोजन किया गया। व्याख्यान सत्र के मुख्य प्रवक्ता चिन्मय मिशन के प्रख्यात दर्शन शास्त्री आध्यात्मिक गुरु स्वामी अभेदानंद जी थे। इस व्याख्यान सत्र में चिन्मय मिशन के गणमान्य सदस्य, विद्यालय की सचिव महोदय डॉ0 कृष्णा गुप्ता, कोषाध्यक्ष श्री रवींद्र गुप्ता, विद्यालय प्रबंध समिति के सम्मानित सदस्य श्री यशोवर्धन गुप्ता, श्रीमती रेखा वेद, विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती अल्पना डे, प्रभारी संचालिकाएं, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। व्याख्यान सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
इस अवसर पर श्री यशोवर्धन गुप्ता ने स्वामी जी को प्रेम स्वरूप उपहार भेंट किया।
स्वामी जी ने अपनी विशिष्ट शैली में अनेक उदाहरणों एवं प्रसंगों के माध्यम से सफल जीवन के सूत्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अपनी सोच को व्यापक बनाना चाहिए और उसे प्राप्त करने हेतु कठोर परिश्रम करना चाहिए। विकट से विकट परिस्थितियों में भी चुनौतियों का सामना पूरे आत्मविश्वास के साथ करना चाहिए साथ ही अभिभावकों के प्रति प्रेम एवं सम्मान की भावना को बनाए रखकर ही हम अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं इसलिए हमें अपना सर्वोत्तम देना चाहिए, आलस्य से दूर रहकर प्रत्येक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन का प्रत्येक क्षण हमें सीखने की प्रेरणा देता है। असफलताएं हमारी कमी नहीं बल्कि सफलता की पूर्व तैयारी है। संकल्प एवं परिश्रम इन दोनों के माध्यम से हम अपने लक्ष्य को सहजता से प्राप्त कर सकते हैं। व्याख्यान सत्र का मूल उद्देश्य छात्रों को हर परिस्थिति में जीवन जीने की प्रेरणा देना और उन्हें जीवन को एक नई दृष्टि से देखने की अपार संभावनाओं के द्वार खोलना था जिससे कि वह स्वयं पर अटूट आत्मविश्वास एवं प्रेरणा के पंख लगाकर असफलताओं को चीरते हुए अपने लिए एक नए क्षितिज की तलाश कर सके। वस्तुतः ‘कभी हार न मानो’ विषय पर आधारित यह व्याख्यान सत्र जीवन जीने की कला सिखाती है जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी संघर्ष न छोड़ने और हार न मानने का मन में विश्वास भरती है।
व्याख्यान सत्र के अंतिम चरण में विद्यार्थियों के अनेक प्रश्नों का समाधान स्वामी जी ने अत्यंत सहजता से दिया।
सत्र के समापन पर विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती अल्पना डेे ने स्वामी जी एवं समागत अतिथियों के प्रति हृदय से धन्यवाद ज्ञपित करते हुए कहा कि आपने सफल जीवन के जो सूत्र हमें दिए हैं वह हमारे लिए अत्यंत अनमोल है। सफलता प्राप्त करनेके लिए परिश्रम के अतिरिक्त कोई दूसरा विकल्प नहीं होता है। ऐसे प्रेरणात्मक एवं सृजनात्मक सत्र के लिए हम हृदय से आपके ऋणी है और भविष्य में भी ऐसे और प्रेरक वचनो के हम आकांक्षी हैं।
