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भाऊराव देवरस ने राष्ट्रधर्म प्रकाशन की स्थापना की और ‘विद्या भारती’ के माध्यम से देश भर में शैक्षणिक संस्थानों की नींव रखी- डॉ नरेंद्र सिंह गौर

भाऊराव देवरस ने राष्ट्रधर्म प्रकाशन की स्थापना की और ‘विद्या भारती’ के माध्यम से देश भर में शैक्षणिक संस्थानों की नींव रखी- डॉ नरेंद्र सिंह गौर

प्रयागराज.राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ , केशव नगर, प्रयाग दक्षिण में जीरो रोड पर आज दिनांक 19 नवंबर 2025 दिन बुधवार को माननीय भाऊ राव देवरस एवम् एक नाथ रानाडे का जन्म जयंती मनाई गई इस अवसर पर पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री माननीय नरेंद्र सिंह गौर ने भाऊ राव देवरस जी को याद करते हुए कहा वीर प्रसूता भारत माता की कोख से ऐसे अनगिनत लाल जन्में, जिन्होंने देश हित में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। भाऊराव देवरस उनमें से एक ऐसा नाम है। जिसने अपने जीवन के 65 वर्षों में एक-एक क्षण राष्ट्र के लिए जिया। वैसे तो देवरस परिवार मूलतः आंध्र प्रदेश का था, पर पेशवा बाजीराव के समय जब हिन्दवी स्वराज्य का सूर्य अपने पूर्ण तेज पर था तो यह परिवार महाराष्ट्र के भंडारा जिले के आम गाँव आकर बसा। कालांतर में यह परिवार आम गाँव से स्थानांतरित होकर मध्यप्रदेश के बालघाट जिले के करिंजा नामक स्थान पर आ बसा।

भाऊराव जी के पिता श्री दत्तात्रेय देवरस राजस्व विभाग में अधिकारी थे। माँ अत्यंत सरल व विनम्र स्वभाव की गृहणी थीं। पिताजी की नौकरी के क्रम में सबका नागपूर आना हुआ। भाऊराव देवरस 19 नवम्बर 1917 को जन्में नौ भाई-बहनों के परिवार में भाईयों में सबसे छोटे थे। उनका पूरा नाम मुरलीधर दत्तात्रेय देवरस था। प्यार से सब उन्हें भाऊ कहकर पुकारते थे। तीन भाई, क्रमश: नामी वकील, पुलिस अधिकारी एंव डाक्टर बने पर चौथे भाई बाला साहव देवरस व पांचवे भाऊराव देवरस देश को सामर्थ्यवान बनाने के लक्ष्य की पूर्ति हेतु राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के जीवनव्रती प्रचारक बने। सम्भवतः नियति को यही स्वीकार्य था। बड़े भाई बालासाहब जी संघ संस्थापक डाक्टर जी के सम्पर्क में पहले आए फिर भाऊराव जी का भी संघ सम्पर्क हुआ और डाक्टर जी से नैकट्य मिला। नागपुर में ही भाऊराव जी ने बी.ए. तक की शिक्षा प्राप्त की थी। वर्ष 1937 (20 वर्ष की अवधि) में डाक्टर जी की संघ विस्तार की योजना के अंतर्गत भाऊराव जी नागपुर से सुदुर उत्तर प्रदेश के लखनऊ आ गए।

प्रखर विद्यार्थी एंव शिक्षा में उनका स्थान – भाऊराव जी की घर में आर्थिक स्थिति बहुत सबल न थी पर उनके सम्बन्धी की भाऊराव को आगे बढ़ाने की प्रबल इच्छा के कारण लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्ययन का अवसर मिल गया। उन दिनों लखनऊ विश्वविद्यालय में एक ही समय में दो डिग्री पाने की व्यवस्था के अन्तर्गत भाऊराव जी ने बी.कॉम एंव एल. एल. बी. की एक साथ शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा में उनकी कुशाग्रता व प्रखरता का परिणाम यह रहा कि उन्होंने तन्मयता से अध्ययन करते हुए विश्वविद्यालय में उन दोनों विषयों में सर्वाधिक अंक पाकर स्वर्ण पदक प्राप्त किया। उसी अवधि में उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के अध्यक्ष पद पर भी विजय प्राप्त की। सोचिए जो व्यक्ति अपने घर से इतनी दूर संघ कार्य विस्तार के लिए आया हो वह अध्ययन के क्षेत्र में भी अग्रगण्य रहा व छात्र शक्ति का नेतृत्व भी किया।

उनकी इस प्रखरता के आधार पर विश्वविद्यालय में उन्हें अध्यापन कार्य का सुअवसर मिल सकता था पर वह तो उस देश के सामान्य जनों के हितों के लिए अपना जीवन समर्पित करने को तत्पर थे। उन्हें सीमित क्षेत्र में रहकर जीविकोपार्जन की चिंता से क्या मतलब? उत्तरप्रदेश में संघ कार्य को जन्म देकर विस्तार देने वाले भाऊराव जी ने कार्यकर्ताओं की श्रृंखला तो खड़ी की ही, साथ ही अन्यान्य क्षेत्रों में कार्य विस्तार के साथ शिक्षा क्षेत्र में एक अनुपम प्रयोग कर गए।

****इस अवसर पर सुमंगलम चंiडी के संचालक माननीय अरविंद जी ने कहा भाऊराव जी का जन्म स्वातंत्र्य पूर्व हुआ था, स्वाभाविक है उनकी शिक्षा भी उसी काल में पूर्ण हुई। अपने जीवन काल में परतंत्रता के उस कठिन व कड़वे वातावरण में उन्हें अनेक पीड़ादायक अनुभव हुए थे। गुरु परंपराओं वाले उस देश में शिक्षा का वह उत्कर्षकाल भी उनके संज्ञान में था और परकीय शासन में शिक्षा की दुरवस्था व उसके परिणाम से भी पूर्णत: परिचित थे। सभी समस्याओं का एक मात्र कारण वह गुलामी, दारिद्रय, आपसी झगड़े, स्वार्थपरता की पराकाष्ठा व अहिंसा को मानते थे। परकीय शासन में उनका निराकरण सम्भव न था। इसीलिए स्वतंत्रता के पांच वर्ष पश्चात 1952 में शिशुमंदिर योजना आंरम्भ करने के पीछे जो उनका सपना था उसका क्रियान्वयन उत्तर प्रदेश के गोरखपुर केंद्र से हो सका। वह एक नन्हा पौधा आज विशाल वटवृक्ष बनकर शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रतिमान बनकर उभरा है। अपने जीवन काल में ही कार्यकर्ताओं के मध्य उनके कर्तव्यों और संदेशों से जो सन्देश मिलते थे, उनका अनुभव हम आज भी करते हैं।
कार्यक्रम का संचालन विभाग घुमंतू प्रमुख अमित जी द्वारा किया गया , भारत माता की आरती राम प्रकाश जी द्वारा, धन्यवाद नगर संघ चालक राजेंद्र जी ने किया इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख लोगों में अविनाश , अमित, अरुण , अनिल, गिरीश , ज्योति, अरविंद, विकाश , संजय, मदन , सुशील , विष्णु आदि उपस्थित रहे

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