जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अधोक्षजानंद देवतीर्थ जी महाराज का जम्मू-कश्मीर में तीन दिवसीय प्रवास सम्पन्न

जम्मू-कश्मीर
सनातन धर्म की सर्वोच्च आध्यात्मिक परंपरा के शिरोमणि, पूर्वाम्नाय गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अधोक्षजानंद देवतीर्थ जी महाराज का जम्मू-कश्मीर का तीन दिवसीय प्रवास आध्यात्मिक ऊर्जा, राष्ट्रभाव और सामाजिक समरसता का अद्वितीय संगम सिद्ध हुआ।
प्रवास के प्रथम दिवस – डोगरा शौर्यभूमि में श्रद्धांजलि समारोह।
भारत की अखंडता के महान प्रहरी, राजनीति के महागणितज्ञ एवं जनता की आशाओं के मार्गदर्शक स्वर्गीय गिरधारी लाल डोगरा जी की 38वीं पुण्यतिथि पर आयोजित विराट श्रद्धांजलि सभा शंकराचार्य जी महाराज के पावन सानिध्य में मनायी गयी।
इस अवसर पर उन्होंने कहा गिरधारी लाल डोगरा जी का संपूर्ण जीवन सत्ता नहीं, जनकल्याण को समर्पित रहा।
‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ — यही उनके जीवन का मूल मंत्र था।
उन्होंने युवाओं से राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
माता वैष्णो देवी भवन में महायज्ञ व राष्ट्र-कल्याण की कामना।
श्रद्धांजलि सभा के उपरांत शंकराचार्य जी माता वैष्णो देवी भवन, कटरा पहुँचे।
यहाँ उन्होंने —
• राष्ट्र की अखंड प्रगति
• जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति एवं विकास
• तथा समस्त विश्व की मंगलकामना
के लिए विशेष मंत्रोच्चार एवं महायज्ञ संपन्न कराया।
भवन “जय माता दी” के गुंजायमान उद्घोषों से अनुपम आस्था का केंद्र बन गया।
द्वितीय दिवस – हीरानगर में जनमानस को संबोधन
हीरानगर में भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने उनका भव्य स्वागत किया।
उन्होंने कहा जहाँ से जनकल्याण की धारा प्रवाहित हो, वही सच्ची कर्मभूमि है।
डोगरा जी ने इस भूमि को लोकसेवा का केंद्र बनाया था।
उनके उद्बोधन ने सामाजिक एकता, कर्तव्य बोध और राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ संदेश प्रदान किया।
तृतीय दिवस – चूड़ामणि संस्कृत संस्थान, बसोहली कठुआ में आध्यात्मिक मार्गदर्शन।
चूड़ामणि संस्कृत संस्थान, बसोहली कठुआ में शंकराचार्य जी के आगमन पर संस्थान के बटुकों आचार्यों और नगरवासियों ने पूर्णकलस भेंटकर वेदमंत्रों से स्वागत किया संस्थान के प्रबंध निदेशक श्री शक्ती पाठक जी आद्य गुरु शंकराचार्य के 2500 वर्ष प्राचीन चरण पादुकाओं का पूजन किया।आयोजित कार्यक्रम में शंकराचार्य जी ने कहा संस्कृत भारत की आत्मा है — सभ्यता, विज्ञान, आध्यात्म और राष्ट्रीयता का मूल आधार।
संस्कृत के बिना भारत की पहचान अधूरी है। उन्होंने छात्र–छात्राओं को वेद–शास्त्र अध्ययन हेतु आशीर्वाद प्रदान किया और वैदिक संस्कृति के संरक्षण का आह्वान किया।
गणमान्य व्यक्तित्वों की गरिमामयी उपस्थिति रही l इसके पूर्व बसोहली रावी नदी के किनारे चूडामणि संस्कृत संस्थान के नये विस्तार में निर्माणाधीन इमारत का शंकराचार्य अवलोकन किया और सम्पूर्ण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी प्राप्तकिया। संस्थान के उन्नति और उज्जवल भविष्य की कामना किया।
इस यात्रा व श्रद्धांजलि कार्यक्रम में निम्न प्रमुख हस्तियों ने सहभागिता निभाई—
• श्रीमती संगीता जेटली
• श्रीमती निधि डोगरा
• महामंडलेश्वर श्री रामेश्वर दास जी महाराज
• महंत रोहित शास्त्री (स्टेट अवॉर्डी- श्री कैलखज्योतिषएवं वैदिक संस्थानट्रस्ट)
• श्री सत शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद
• श्री रमन भल्ला, कार्यकारी अध्यक्ष — J&K कांग्रेस
• विधायक — श्री सतीश शर्मा, श्री अरविंद गुप्ता, श्री चंद्र प्रकाश गंगा, डॉ. सुनील भारद्वाज, श्री युद्धवीर सेठी
• पूर्व मंत्री श्री भूषण जामवाल
• श्री शक्ति पाठक, डायरेक्टर — एंटी करप्शन ब्यूरो, जम्मू
• विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया
• अनेक धार्मिक–सामाजिक संगठन, विद्वान एवं नागरिक समुदाय
सभी गणमान्यजनों ने स्वर्गीय गिरधारी लाल डोगरा जी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर राष्ट्रवादी राजनीति के इस महान स्तंभ को श्रद्धासुमन समर्पित किए। और जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया।
