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मांडा गोली कांड में फसाए गए पूर्व प्रधान सहित सभी को हाईकोर्ट ने किया दोषमुक्त

मांडा गोली कांड में फसाए गए पूर्व प्रधान सहित सभी को हाईकोर्ट ने किया दोषमुक्त


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिले के चर्चित हत्या कांड मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए उम्रकैद की सजा पाये चार आरोपितों को बरी कर दिया। मामला दिसंबर 2010 का मांडा थाने से जुड़ा हुआ है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा एवं न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद निचली अदालत का फैसला पलटते हुए अभियुक्त राकेश तिवारी, कमलेश तिवारी, वेदमानी तिवारी, नागेश्वर तिवारी के तत्काल रिहाई का आदेश दिया। अपील पर सुनवाई के दौरान अभियुक्तों की ओर से वरीय अधिवक्ता मनीष तिवारी तथा अधिवक्ता राजीव लोचन शुक्ला एवं अथर्व दीक्षित ने दलील दी कि साक्षियों ने न तो घटनास्थल का सटीक विवरण दिया और न ही हत्या के बारे में कोई ठोस गवाही सामने आई। अगला तर्क यह है कि वादी मुकदमा विनय तिवारी ने कहा कि जिस समय वह प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने पुलिस स्टेशन पहूंचा, उस समय वह अपने लाइसंसी रिवॉल्वर से लैस था जो कि उसने सिक्योरिटी की नौकरी के लिए लेकर रखे थे। हालाॉकि, जिरह के दौरान, इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया कि किस समय उसने अपना लाइसेंसी बंदूक उसके हाथ लगा और इस्तेमाल होने के तथ्य की पुलिस ने कभी जाॉच नहीं की। इसलिए वादी मुकदमा के पास रिवॉल्वर होने और अवोलकताओं के विद्वान वकील का कहना है कि इस बात की पूरी संभावना है कि मृतक की मौत वादी मुकदमा के बन्दूक से चली गोली से हुई हो।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोप राजनीतिक विद्वेष का परिणाम हैं। खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष ठोस एवं विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा है, जिसके चलते चारों अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में और विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अनुसार मृतक दया शंकर तिवारी के शरीर से पायी गयी गोली का मिलान अभियुक्तगण राकेश नाथ व कमलेश नाथ के रिवाल्वर से नहीं हआ है। इस प्रकार विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट से अभियोजन कथानक को कोई समर्थन प्राप्त नहीं होता है। इन सभी तथ्य की अनदेखी करते हुए कि न केवल प्रत्यक्षदर्शियों के बयान में बल्कि पुलिस गवाहों के बयान में गंभीर और बड़े विरोधाभास और चूक है,जो पूरी कहानी को संदिग्ध बनाती है और साक्ष्यों आभाव तथा गुण दोष के आधार पर इसका लाभ अपीलकर्ता को मिला। केस की पैरवी कर रहे राहुल तिवारी और सचिन तिवारी और गांव के अन्य लोगों ने खुशी व्यक्त किया और कहा कि सत्य की हमेशा जीत होती है।

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