माघ मेले में कलश यात्रा एवं गंगा पूजन के साथ शुरू हुई भागवत कथा

प्रयागराज
तीर्थराज प्रयाग की पावन माघ मेला भूमि पर कलश यात्रा गैवी नाथ अन्न क्षेत्र से घोड़ा और बग्घी से आरंभ हुई उसके बाद गंगा तट पर गंगा जी की आरती और पूजन किया उसके बाद पुनः गैवी अन्न क्षेत्र पुल नंबर छ पर आकर सानंद संपन्न हो गई.यात्रा के बाद भक्तों ने भागवत माहात्म्य में प्रवेश किया.
भागवत कथा के पहले दिन यजमान हरि शंकर मिश्र और कमलेश देवी के द्वारा आचार्य शुकस्वरूप आचार्य सतानंद जी महाराज के द्वारा साप्ताहिक कथा का आयोजन किया गया जिसमें आचार्य सतानन्द महाराज जी ने बताया कि किस प्रकार भक्ति महारानी का दुख कथा श्रवण मात्र से दूर हो गया और ज्ञान वैराग्य पुष्ट हो गए और अत्यंत पापी होने पर भी किस प्रकार(धुन्धुकारी महाखल:)धुंधकारी जैसा पापी भी भगवान के धाम को चला गया व्यास जी ने कथा का सार सुनाते हुए कहा कि मन की व्यथा का निवारण भगवान की कथा से ही हो सकता है इस मौके पर रघुनाथ द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद मिश्रा मनोज मिश्र अमित मिश्र बबिता देवी सुधा देवी नारायण देव त्रिपाठी ममता देवी आशीष शुक्ला आदि हजारों की संख्या में भागवत श्रोता ने कथा का श्रवण किया
