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आयुर्वेद में अनुसंधान की अपार संभावनाएँ – डॉ जी एस तोमर

आयुर्वेद में अनुसंधान की अपार संभावनाएँ – डॉ जी एस तोमर

गंगा नाथ झा परिसर में भारतीय ज्ञान परम्परा पर कार्यशाला

प्रयागराज: भारतीय ज्ञान परम्परा केन्द्र, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, गंगा नाथ झा परिसर द्वारा आयोजित “भारतीय ज्ञान परम्परायां नवानुसंधानम्” विषयक् राष्ट्रीय कार्यशाला में बतौर अतिथि वक्ता अपने व्याख्यान में विश्व आयुर्वेद मिशन के संस्थापक अध्यक्ष एवं आरोग्य भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो.(डॉ.) गिरीन्द्र सिंह तोमर ने “आयुर्वेद अनुसंधान के भविष्य की संभावनाएँ” विषय पर अपना विस्तृत उद्बोधन दिया । डॉ तोमर ने बताया कि यद्यपि आयुर्वेद समय परीक्षित (टाइम टैस्टेड) चिकित्सा विधा है तथापि इसकी बढ़ती हुई लोकप्रियता आज भारत की चारदीवारी से निकलकर वैश्विक क्षितिज पर स्थापित हो रही है । अत: वैश्विक परिदृश्य में इसे उनकी ही भाषा में समझाने के लिये साक्ष्य आधारित बनाना समय की माँग है । इसमें वर्णित तथ्यों को वैज्ञानिक कसौटी पर प्रमाणित करना बहुत आवश्यक है । इस क्षेत्र में अनुसंधान की अपार संभावनाएँ हैं । उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन भी आज आयुर्वेद जैसी प्रभावी पारम्परिक चिकित्सा पर अनुसंधान के नए नए आयाम स्थापित कर रहा है । अकेले अश्वगंधा पर वर्तमान में 20 हज़ार से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं जो पब्लिक डोमेन में विद्यमान हैं । यही नहीं जीर्ण एवं दुश्चिकित्स्य रोगों में आयुर्वेद की कार्मुकता आज सम्पूर्ण चिकित्सा जगत स्वीकार करने लगा है । सोलहवीं सदी में शारंगधर द्वारा वर्णित जन्म से सौ वर्ष तक का इम्युनाइजेशन शेड्यूल आज विश्व के आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है । ब्राह्मी एवं शंखपुष्पी के बुद्धि वर्धक प्रभाव एवं अश्वगंधा एवं गिलोय के व्याधिक्षमत्व वर्धक गुणों से आज सभी परिचित हैं । इस अवसर पर उन्होंने शोध के छात्रों का आह्वान किया कि वे आगे आकर आयुर्वेद के गूढ़ सिद्धांतों को सरल बनाकर जनोपयोगी बनाएँ । आयुर्वेद पर सही शोध एक टीम वर्क है । जिसमें इण्डोलॉजिस्ट्स, वायोकैमिस्ट्स, फार्मेकोलॉजिस्ट्स, एवं क्लिनीशियन्स सम्मिलित रूप से काम करना होगा, तभी भारतीय ज्ञान परम्परा की इस अमूल्य निधि को सर्वजनहिताय एवं सर्वजनसुखाय बनाया जा सकेगा । व्याख्यान के प्रारम्भ में डॉ यशवंत त्रिवेदी ने डॉ तोमर का परिचय कराया एवं अभिनंदन किया । अन्त में भारतीय ज्ञान परम्परा केन्द्र के अध्यक्ष प्रो देवदत्त सरोदे ने अंगवस्त्रम् एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर डॉ तोमर को सम्मानित किया । हाइब्रिड मोड पर प्रायोजित इस कार्यक्रम में लगभग एक सौ पचास शोध छात्र एवं शिक्षक उपस्थित हुए ।

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