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पद्मश्री पुरस्कार से अलंकृत प्रो. राम हर्ष सिंह जी की 85वीं जन्म जयंती मनाई गई 

पद्मश्री पुरस्कार से अलंकृत प्रो. राम हर्ष सिंह जी की 85वीं जन्म जयंती मनाई गई 

आयुर्वेद के मूर्धन्य विद्वान स्मृति शेष पद्मश्री प्रो. रामहर्ष सिंह जी की 85वीं जन्म जयंती श्री राम हर्षण चिकित्सा निलयम् त्रिवेणीपुरम्, प्रयागराज में धूमधाम से मनाई गई ।इस अवसर पर उनके शिष्य विश्व प्रो.(डॉ.) जी एस तोमर ने अपने उद्बोधन में आचार्य श्रेष्ठ के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला । उन्होंने बताया प्रो0 रामहर्ष सिंह, काशी हिन्दू विशविद्यालय के आयुर्वेद संकाय में डिस्टिंग्विस्ड प्रोफेसर एंव वरिष्ट आयुर्वेद चिकित्सक रहे हैं। प्रो0 सिंह ने आयुर्वेद चिकित्सा को युगानुरूप स्वरूप तथा उसे वैज्ञानिक धरातल प्रदान करनें में महत्वपूर्ण योगदान किया है जिससे आयुर्वेद को चिकित्सा की मुख्यधारा में जोड़ने के प्रयासों को बल मिला है और विदेशों में भी आयुर्वेद की स्वीकार्यता बढ़ी है।
प्रो0 रामहर्ष सिंह का जन्म जनवरी 10, 1942 को ग्राम कनियारिपुर, कोपागंज, जिला मऊ में हुआ| उन्होंने ए.बी.एम.एस एवं पीएच.डी. बी.एच.यू. से तथा डी.लिट. व फेलो ऑफ राष्ट्रीय आयुर्वेद अकादमी सहित कई अन्य शैक्षणिक योग्यता अर्जित की ।काशी हिन्दू विश्वविद्यालय कायचिकित्सा विभाग, आयुर्वेद संकाय, चिकित्सा विज्ञान संस्थान में 40 वर्षों तक शिक्षण, शोध एवं चिकित्सा कार्य किए । प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष तथा डीन के पदों पर उच्च स्तरीय कार्य सम्पादन किए । सन् 2003-2006 तक वह राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के संस्थापक कुलपति तथा 2006 में वर्षपर्यन्त दक्षिण कोरिया के वोनक्वांग डिजिटल विश्वविद्यालय में चेयर प्रोफेसर तथा पुन: बी.एच.यू. में इमेरिटस प्रोफेसर और पुन: अप्रैल 2012 से आजीवन डिस्टिंग्विस्ड प्रोफेसर के पद पर कार्यरत रहे ।
वह भारत सरकार द्वारा गठित आयुष सेक्टर इनोवेशन काउंसिल के अध्यक्ष थे । प्रो सिंह राष्ट्रीय विज्ञान इतिहास आयोग, आई.एन.एस.ए. के सदस्य रहे।उन्होंने लगभग 80 एम.डी.(आयुर्वेद) तथा 40 पीएच.डी. धारकों का सफल निर्देशन किया । प्रो0 सिंह ने अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, योरप, रशिया, जापान आदि अनेक देशों कि शैक्षणिक एंव अकादमिक यात्रा कर विदेशों में आयुर्वेद का प्रचार प्रसार करते हुए आयुर्वेद के वैश्वीकरण को गति प्रदान करने में अहं भूमिका निभाई। आपको भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित नागरिक अलंकरण पद्मश्री से वर्ष २०१६ में सम्मानित किया गया है । उन्हें भारत सरकार के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय धनवंतरी आयुर्वेद पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया ।डॉ सिंह को एम्स नई दिल्ली द्वारा लाइफटाइम एचीवमेंट अवार्ड से भी सम्मानित किया गया । वह कई अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं के संपादक भी रहे हैं। प्रो0 सिंह ने आयुर्वेदीय शिक्षण एवं अनुसंधान में राष्ट्रीय नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण योगदान किए । जीर्ण व्याधियों की चिकित्सा एवं जरा-स्वास्थ्य प्रबंधन आपके वैशिष्ठ्य के विषय रहे । आयुर्वेदीय रसायनतंत्र विशेषत: मेध्य रसायनों पर उनके शोध कार्य महत्वपूर्ण माने जाते हैं। आपनें राष्ट्रीय / अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में 200 शोधपत्र तथा 20 महत्वपूर्ण ग्रंथ प्रकाशित किए हैं जो राष्ट्रीय स्तर पर समादृत हैं।
कार्यक्रम में पुष्पांजलि के उपरान्त डॉ वी एन त्रिपाठी, डॉ कामता प्रसाद, डॉ निर्मला तोमर, डॉ अवनीश पाण्डेय व राजेन्द्र सिंह ने भी अपने संस्मरण रखे । इस अवसर पर अंकुर सिंह, मनीष शुक्ला एवं अभिषेक मिश्रा आदि अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे ।

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