दिव्यांगजनो को दो दिनों में 38 निःशुल्क कृत्रिम उपकरण वितरित

अरेल, प्रयागराज
आगामी दस वर्षों में भारत को शारीरिक अक्षमता से मुक्त करने के उद्देश्य से परम पूज्य स्वामी श्री चिदानंद सरस्वती जी महाराज (मुनि जी) के प्रेरणा, दिव्य आशीर्वाद और मार्गदर्शन में आगे बढ़ रही है। दिव्यांगता मुक्त भारत (डी.बी.एम.) एक राष्ट्रीय मिशन है जिसे महावीर सेवा सदन (एम.एस.एस.), कोलकाता और परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के द्वारा परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष – स्वामी श्री चिदानंद सरस्वती जी महाराज के दिव्य आशीर्वाद और मार्गदर्शन में दिनांक 22 से 27 फरवरी 2026, तक परमार्थ त्रिवेणी पुष्प अरैल घाट के पास नैनी, प्रयागराज मे दिव्यांगजनो को निःशुल्क उपकरण प्रदान किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 22 एवं 23 फरवरी 2026 को कुल 38 दिव्यांगजनों को निःशुल्क कृत्रिम उपकरण वितरित किया गया।
डॉ पुष्पेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि हमारा सपना बहुत स्पष्ट है कि जहाँ कोई बच्चा अपने सपनों से पहले अपनी मजबूरी न देखे, जहाँ कोई युवा बैसाखी के सहारे नहीं, आत्मविश्वास के सहारे चले, और जहाँ कोई बुजुर्ग स्वयं को बोझ नहीं, बल्कि सम्मानित महसूस करे। दिव्यांगता मुक्त भारत का लक्ष्य हैं। हम सभी जानते हैं कि दिव्यांगता किसी व्यक्ति की कमजोरी नहीं होती कमजोरी तब होती है जब समाज उस व्यक्ति का साथ नहीं देता। और इसी सोच को बदलने के लिए जन्म हुआ है। दिव्यांगता मुक्त भारत मिशन का लक्ष्य है। उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर से शुरू हुई यह सेवा-यात्रा आज मध्य प्रदेश, गुजरात, ओडिशा और उत्तर प्रदेश तक पहुँच चुकी है, और अब दिव्यांगता मुक्त उत्तर प्रदेश की पहल के अंतर्गत प्रयागराज में सेवा देते हुए निशुल्क कृत्रिम अंग व अन्य उपकरण प्रदान करेंगे । परमार्थ निकेतन पिछले कई दशकों से अपने नाम के अनुरूप परमार्थ और सेवा कार्यों में लगी हुई है, यह केवल संस्था नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए आशा की लौ रहा है। परम पूज्य स्वामी जी के दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, नदियों को बचाओ और मानवीय सेवा के माध्यम से परमार्थ ने यह सिखाया है कि सच्ची आध्यात्मिकता वही है, जो पीड़ा को कम करे। वहीं महावीर सेवा सदन ने सेवा को संकल्प में बदला है। अब तक पाँच लाख से अधिक दिव्यांगजनों को निःशुल्क कृत्रिम अंग देकर उनके पैरों को ही नहीं, उनकी जिंदगी को गति दी है। सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बच्चों के लिए बनाया गया पुनर्वास केंद्र भारत में करुणा और प्रतिबद्धता का अद्भुत उदाहरण है। इसी करुणा और सेवा की भावना को आगे बढ़ाते हुए, आज हमें यह बताते हुए हृदय से प्रसन्नता हो रही है कि दिव्यांगता मुक्त भारत मिशन के अंतर्गत परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, प्रयागराज में एक निःशुल्क कृत्रिम अंग वितरण शिविर आयोजित किया गया। यह टूटे हुए आत्मविश्वास को फिर से खड़ा करने का प्रयास है ।यहाँ किसी को इंतजार नहीं करना पड़त। उसी दिन माप, फिटिंग के साथ जिंदगी की नई शुरुआत हो गई ।
