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शास्त्रों के मर्मज्ञ डॉ प्रभात शास्त्री का अवदान अविस्मरणीय – प्रो रामसेवक दुबे

शास्त्रों के मर्मज्ञ डॉ प्रभात शास्त्री का अवदान अविस्मरणीय – प्रो रामसेवक दुबे

प्रयागराज हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग के राजर्षि टंडन मंडपम में हिंदी साहित्य सम्मेलन के उन्नायक पूर्व प्रधानमंत्री डॉ प्रभात शास्त्री की १०८ वीं जयंती श्रद्धा पूर्वक मनाई गई जिसमें मुख्य अतिथि जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर के पूर्व कुलपति प्रो रामसेवक दुबे रहे। सर्वप्रथम हिंदी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमंत्री कुन्तक मिश्र ने मुख्य अतिथियों और अन्य विद्वतजनों के साथ संयुक्त रूप से डा प्रभात शास्त्री के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित करके समारोह की शुरुवात की। इसके पश्चात सौदामिनी संस्कृत महाविद्यालय के बटुको द्वारा स्वस्तिवाचन पाठ किया गया।

प्रधानमंत्री कुन्तक मिश्र ने अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। समारोह में सर्वप्रथम झुंझुनूं से आए विद्वान प्रो मूलचंद ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृत ने मां का फर्ज निभाते हुए ज्ञान व संस्कार दिए और हिंदी बेटी का धर्म निभाते हुए उस विरासत को जन जन तक पहुंचा रही है। सम्मेलन के परीक्षामंत्री प्रो हरिनारायण दुबे ने अपने वक्तव्य में कहा, डॉ प्रभात शास्त्री ने गीतिकाव्य और पुराणों की परम्परा को जीवित किया। वह संस्कृत के साथ हिंदी के मर्मज्ञ विद्वान थे। पालि भाषा के साहित्य का अनुवाद कर जन जन तक पहुंचाना उनका उद्देश्य था। मुख्य अतिथि प्रो रामसेवक दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि सरस्वती के वरद पुत्र डॉ प्रभात शास्त्री अनेक शास्त्रों के ज्ञाता थे। उनके साहित्यिक अवदान को भुलाया नहीं जा सकता। हिंदी साहित्य सम्मेलन के साहित्यमंत्री प्रो रामकिशोर शर्मा ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा ज्ञान विज्ञान का भण्डार है। भाषा बचेगी तो संस्कृति बचेगी इसलिए भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए ऐसे आयोजन का होना नितांत आवश्यक है।
इस दौरान संस्कृत भाषा एवं साहित्य सेवा में उल्लेखनीय योगदान देने वाले आचार्य पं नथमल शास्त्री दाधीच (चुरु), डॉ गायत्री प्रसाद पांडेय (वाराणसी), प्रो कृपाराम त्रिपाठी (बलरामपुर), प्रो कृष्णकांत शर्मा (वाराणसी), डॉ बाबूलाल मिश्र (प्रयागराज), प्रो प्रयाग नारायण मिश्र (प्रयागराज), डॉ चंद्रभूषण झा (दिल्ली), प्रो मूलचंद (झुंझुनूं), डॉ आशा सिंह रावत (दिल्ली) को संस्कृत महामहोपाध्याय की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया।
समारोह में मुख्य रूप से सम्मेलन के सहायक मंत्री श्यामकृष्ण पांडेय, कार्यवाहक उपसभापति विभूति मिश्र, प्रचारमंत्री डॉ सचिंद्रनाथ मिश्र, स्नेहलता मिश्र, किरणबाला पांडेय, परीक्षायोजक किंठमणि प्रसाद मिश्र, कोषाध्यक्ष आनंद श्रीवास्तव, मुद्रणालय व्यवस्थापक अंजनी कुमार शुक्ल, कार्यवाहक कार्यालय अधीक्षक पवित्र तिवारी, पद्माकर मिश्र, डॉ सुजीत शर्मा, डॉ पीयूष मिश्र, नरेंद्र देव पांडेय, दुर्गानंद शर्मा, कमलेंद्र त्रिपाठी, कृष्णकुमार पांडेय, सौरभ पाण्डेय समेत अनेक साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।

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