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अधिवक्ताओं को निःशुल्क आवंटित किए जाएं चैंबर्स: मनीष द्विवेदी

अधिवक्ताओं को निःशुल्क आवंटित किए जाएं चैंबर्स: मनीष द्विवेदी

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली को संबोधित ज्ञापन महानिबंधक मंजीत सिंह श्योराण को सौंपा

 

विधि संवाददाता प्रयागराज। हाईकोर्ट में अधिवक्ताओं को मिलने वाले नवनिर्मित अधिवक्ता चैम्बर्स के आवंटन की प्रक्रिया का अधिवक्ताओं ने विरोध किया है। चैंबर आवंटन हेतु निर्धारित शुल्क को लेकर अधिवक्ताओं विशेषकर युवा एवं संघर्षशील अधिवक्ताओं में गहरी चिंता एवं निराशा व्याप्त है। शनिवार को हाईकोर्ट के त्रिभुवन उपाध्याय हाल में बैठक कर अधिवक्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरूण भंसाली और चैंबर्स आवंटन समिति के अध्यक्ष वरिष्ठ न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नवनिर्मित अधिवक्ता चैम्बर्स सम्मानित अधिवक्ताओं को नि:शुल्क आवंटित किया जाए। इसे लेकर हाईकोर्ट के अधिवक्ता मनीष द्विवेदी की अगुवाई में शनिवार को मुख्य न्यायाधीश को संबोधित ज्ञापन उच्च न्यायालय इलाहाबाद के महानिबंधक मंजीत सिंह श्योराण को सौंपा गया। अधिवक्ता मनीष द्विवेदी ने कहा कि चूंकि चैंबर्स भवन का निर्माण उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कराया गया है, ऐसे में चैंबर्स निःशुल्क आवंटित किया जाना न्यायोचित होगा। साथ ही आम अधिवक्ताओं की सुविधा के लिए नवनिर्मित अधिवक्ता चैम्बर्स का निर्धारित शुल्क (भुगतान) एकमुश्त न करके किश्त में करने की सुविधा विकल्प के तौर पर अधिवक्ताओं को प्रदान की जाए। अधिवक्ताओं ने एक स्वर से मांग की है कि अधिवक्ता चैम्बर्स के लिए देखरेख और रखरखाव के लिए भी जो राशि निर्धारित है उसे न्यूनतम का रखा जाए। क्योंकि आम अधिवक्ता इतना अधिक शुल्क देने में असमर्थ है। कहा कि अधिवक्ताओं के हित को देखते हुए निर्धारित शुल्क पर पुनर्विचार किया जाए।

अधिवक्ताओं ने कहा कि उच्च न्यायालय परिसर में वर्षों के संघर्ष, अथक प्रयास एवं अधिवक्ता समाज की लंबी प्रतीक्षा के बाद नवनिर्मित अधिवक्ता चैंबर एवं पार्किंग भवन निश्चित रूप से एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। ऐसे में अधिवक्ताओं की सुविधा को देखते हुए आवंटन की प्रक्रिया की जाए। क्योंकि अधिवक्ताओं को समय समय पर कहा जाता है कि अधिवक्ता न्यायालय का अधिकारी (Officer of the Court) है, तब यह अपेक्षा भी स्वाभाविक है कि अधिवक्ताओं के लिए निर्मित अधिवक्ता चैम्बर्स आवंटन प्रक्रिया एवं शुल्क संरचना उनके सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्धारित किया जाना चाहिए। बैठक में अधिवक्ता गुरु प्रसाद मिश्रा, मनीष द्विवेदी, आशीष दुबे, पुष्कर मिश्रा, सर्वेश सिंह, राज शर्मा, सुशील सिंह, राजीव कुमार तिवारी, सतीश धुरिया, जय प्रकाश तिवारी, शशांक सिंह, राहुल ओझा, फूलचंद्र सिंह, कृपेश मिश्रा, राहुल गौड़, हरीश प्रताप सिंह, अजय सिंह, दिनेश दुबे, शैलेश पाण्डेय, ओंकार जायसवाल, कमल देव पांडेय, मुकेश पांडेय, राजेश शुक्ला, शिवमूर्ति कुशवाहा आदि रहे।

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