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आयुर्वेद स्वस्थ जीवन की समृद्ध भारतीय परंपरा : प्रवीण पटेल 11वें आयुर्वेद दिवस पर जीबी पंत संस्थान में आयोजन, 14 विभूतियां सम्मानित

 

आयुर्वेद स्वस्थ जीवन की समृद्ध भारतीय परंपरा : प्रवीण पटेल

11वें आयुर्वेद दिवस पर जीबी पंत संस्थान में आयोजन, 14 विभूतियां सम्मानित

प्रयागराज। आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की समृद्ध भारतीय परंपरा है। इसमें रोगों के उपचार के साथ स्वास्थ्य संरक्षण और रोगों की रोकथाम का व्यापक दृष्टिकोण है। यह बात बुधवार को 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर जीबी पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान में आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि फूलपुर सांसद प्रवीण पटेल ने कही।

आयुष विभाग, प्रयागराज एवं जीबी पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह का शुभारंभ सांसद प्रवीण पटेल, संस्थान के निदेशक प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह, आरोग्य भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. जीएस तोमर, डॉ. पीएस पाण्डेय तथा क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, प्रयागराज डॉ. नवीन सोनी ने दीप प्रज्वलित कर एवं भगवान धन्वंतरि के चित्र पर माल्यार्पण करके किया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘स्वस्थ कल के लिए आयुर्वेद’ रही।

सांसद प्रवीण पटेल ने कहा कि आधुनिक जीवन की चुनौतियों के दौर में आयुर्वेद ने रोग-निरोधक उपायों और उपचार के साथ दीर्घकालिक स्वास्थ्य का मार्ग भी दिखाया है। विकसित भारत के विजन के अनुरूप स्वास्थ्य का अर्थ केवल बीमारी का उपचार नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाना और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना भी होना चाहिए। उन्होंने आयुर्वेद के वैज्ञानिक पक्ष को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया।

प्रो. जीएस तोमर ने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण में आयुर्वेद की महत्वपूर्ण भूमिका है। आहार-विहार, दिनचर्या, ऋतुचर्या, योग एवं प्राकृतिक जीवनशैली को अपनाकर स्वास्थ्य संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सकता है।

डॉ. नवीन सोनी ने प्रयागराज में आयुष विभाग की ओर से 11वें आयुर्वेद दिवस के तहत आयोजित कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जन-जागरूकता कार्यक्रम, स्वास्थ्य शिविर, संगोष्ठी, औषधीय पौधारोपण, ग्राम चौपाल, रन फॉर आयुर्वेद तथा पोस्टर-स्लोगन प्रतियोगिता, सेमिनार, स्वास्थ्य शिविर सहित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। इनका उद्देश्य आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाना और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

संस्थान के निदेशक प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में आयुर्वेद का विशिष्ट स्थान है। आधुनिक समय में आयुर्वेद के वैज्ञानिक अध्ययन, शोध और जनोपयोगी स्वरूप को और व्यापक बनाने की आवश्यकता है।

14 वैद्यों को किया गया सम्मानित

समारोह में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान के लिए प्रो. जीएस तोमर, वैद्य आशुतोष मालवीय, वैद्य शशिकांत राय, डॉ. जयशंकर शुक्ल, डॉ. पीएस पाण्डेय, डॉ. भारत नायक, डॉ. एमडी दुबे, डॉ. शारदा प्रसाद, विजय कुमार सिंह, दीप्ति योगेश्वर, डॉ. वीएन त्रिपाठी, डॉ. वीबी मिश्रा , डॉ. अशोक कुशवाहा एवं डॉ. सूर्या यादव को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर सांसद प्रवीण पटेल द्वारा एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत कांचनार पौधे का रोपण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया।

वैज्ञानिक सत्र में शोध-पत्र प्रस्तुत

वैज्ञानिक सत्र में डॉ. अनिल कुमार, डॉ. खुशनुमा परवीन सिद्दीकी, डॉ. संदीप पाण्डेय, डॉ. राजतिलक तिवारी, डॉ. सुनील दत्त द्विवेदी, डॉ सुमन मिश्रा, डॉ अंजलि मिश्रा एवं डॉ. अवनीश पाण्डेय सहित अन्य वक्ताओं ने आयुर्वेद एवं स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए। आयुर्वेद की समकालीन उपयोगिता, शोध और स्वास्थ्य संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम में डॉ हेमंत सिंह, डॉ मनोज कुमार सिंह, डॉ जे पी सिंह, डॉ अनुराग अस्थाना, आयुष विभाग के चिकित्साधिकारी, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, अधिकारी-कर्मचारी, संस्थान के शिक्षक, शोध छात्र एवं गणमान्यजन मौजूद रहे। संचालन डॉ. विवेक शुक्ला, डॉ. अंजलि मिश्रा एवं डॉ.नीलम यादव ने किया। अंत में सतीश चन्द्र दुबे ने आभार व्यक्त किया

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