प्रयागराज में ‘ब्लाइंड वॉक’ के माध्यम से जागरूकता, समावेशिता और आशा का संदेश
दृष्टिबाधित बच्चों के मार्गदर्शन में लगभग 250 लोगों ने आँखों पर पट्टी बाँधकर किया पैदल मार्च, नेत्रदान और सामाजिक एकजुटता का दिया संदेश

प्रयागराज,
विश्व दृष्टि दिवस 2026 (World Sight Day) के अवसर पर नाज़रेथ अस्पताल एवं दिव्य ज्योति निकेतन, प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष ‘ब्लाइंड वॉक’ (नेत्रहीन अनुभव पदयात्रा) का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दृष्टिबाधित व्यक्तियों के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना, संवेदनशीलता विकसित करना तथा उनके प्रति सहानुभूति, सम्मान और एकजुटता की भावना को प्रोत्साहित करना था।
ब्लाइंड वॉक का शुभारंभ सायं 4:00 बजे सेंट जोसेफ कॉलेज, प्रयागराज से हुआ तथा इसका समापन नाज़रेथ अस्पताल के स्कूल ऑफ नर्सिंग परिसर में हुआ।
कार्यक्रम के प्रारंभ में नाज़रेथ अस्पताल के प्रशासक फादर इसिदोर डिसूज़ा ने ब्लाइंड वॉक के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डाला। उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल आँखों पर पट्टी बाँधकर दृष्टिबाधित व्यक्तियों की कठिनाइयों का अनुभव करना नहीं है, बल्कि उनके जीवन की वास्तविकताओं को समझना, उनकी क्षमताओं को पहचानना तथा उनके प्रति सच्ची संवेदनशीलता और एकजुटता व्यक्त करना है।
उन्होंने अपने संबोधन में तीन महत्वपूर्ण संदेशों पर विशेष बल दिया— पहला, दृष्टिबाधित व्यक्तियों के जीवन और उनकी चुनौतियों को समझना तथा उनके साथ एकजुटता प्रदर्शित करना; दूसरा, दृष्टिबाधित व्यक्तियों तक पहुँचकर उन्हें प्रेम, सम्मान और व्यावहारिक सहयोग प्रदान करना; तथा तीसरा, मृत्यु के पश्चात नेत्रदान का संकल्प लेना, ताकि किसी अन्य व्यक्ति के जीवन में दृष्टि का प्रकाश पहुँचाया जा सके।
उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से नेत्रदान के प्रति जागरूकता फैलाने तथा एक अधिक संवेदनशील, समावेशी और करुणामय समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर इलाहाबाद धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष परम आदरणीय बिशप लुईस मस्करेन्हास ने पदयात्रा प्रारंभ होने से पूर्व सभी प्रतिभागियों के लिए विशेष प्रार्थना की तथा उन्हें अपना आशीर्वाद प्रदान किया। इसके पश्चात उन्होंने फीता काटकर ब्लाइंड वॉक का विधिवत शुभारंभ किया।
विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा कि बिशप लुईस मस्करेन्हास ने स्वयं अपनी आँखों पर पट्टी बाँधकर इस पदयात्रा में भाग लिया। उनकी इस प्रेरणादायक सहभागिता ने उपस्थित सभी लोगों को उत्साहित किया तथा दृष्टिबाधित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशीलता और एकजुटता का सशक्त संदेश दिया।
इस ब्लाइंड वॉक में लगभग 250 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इनमें पुरोहितगण, धर्मबहनें, चिकित्सक, नर्सिंग छात्र-छात्राएँ, अस्पताल के कर्मचारी तथा प्रयागराज के नागरिक शामिल थे।
इस आयोजन का सबसे भावनात्मक और प्रेरणादायक पहलू यह रहा कि सभी प्रतिभागियों ने अपनी आँखों पर पट्टी बाँधकर पदयात्रा की, जबकि दिव्य ज्योति निकेतन के दृष्टिबाधित बच्चों ने उनका मार्गदर्शन किया।
यह अनुभव अपने आप में अत्यंत अनूठा था। जिन दृष्टिबाधित व्यक्तियों को सामान्यतः दूसरों की सहायता की आवश्यकता वाला समझा जाता है, उन्हीं बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास, साहस और कुशलता के साथ आँखों पर पट्टी बाँधे प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
इस अनुभव ने न केवल दृष्टिबाधित बच्चों की अद्भुत क्षमताओं, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास को उजागर किया, बल्कि प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर भी प्रदान किया कि दृष्टि के अभाव में दैनिक जीवन की सामान्य गतिविधियाँ भी कितनी चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।
पदयात्रा का समापन नाज़रेथ अस्पताल के स्कूल ऑफ नर्सिंग परिसर में हुआ, जहाँ सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से “बेहतर भारत के लिए नेत्रदान का संकल्प” (Oath to Donate Eyes for a Better India) लिया। इस संकल्प के माध्यम से प्रतिभागियों ने मृत्यु के पश्चात अपनी आँखें दान करने, नेत्रदान के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने तथा अन्य लोगों को भी इस महान मानवीय कार्य के लिए प्रेरित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इस कार्यक्रम ने यह महत्वपूर्ण संदेश दिया कि दृष्टिबाधिता किसी व्यक्ति की प्रतिभा, आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता अथवा समाज में सार्थक योगदान देने की क्षमता में बाधा नहीं बन सकती। आवश्यकता है कि समाज दृष्टिबाधित व्यक्तियों के प्रति अपनी सोच बदले, उनकी क्षमताओं का सम्मान करे तथा उन्हें समान अवसर प्रदान करे।
इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों में इलाहाबाद धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष परम आदरणीय बिशप लुईस मस्करेन्हास, नाज़रेथ अस्पताल के निदेशक फादर विपिन डिसूज़ा, सेंट जोसेफ कॉलेज के प्रधानाचार्य फादर वाल्टर डिसिल्वा, फादर यूजीन मस्करेन्हास, डॉ. ओमर हसन, डॉ. कुर्रतुल ऐन, डॉ. असरा, सिस्टर शाहिदा, श्री सी. के. पाठक, श्री अब्बास नक़वी, सिस्टर प्रीमा, सिस्टर ज्योतिका, सिस्टर एलिस तथा सिस्टर आशा शामिल थे।
कार्यक्रम का समापन “जागरूकता, समावेशिता और आशा के लिए एक साथ” के संदेश तथा नेत्रदान के माध्यम से दूसरों के जीवन में नई रोशनी लाने के दृढ़ संकल्प के साथ हुआ।
इस ब्लाइंड वॉक ने समाज को एक प्रेरणादायक संदेश दिया— “दृष्टि केवल आँखों से नहीं, हृदय की संवेदनाओं से भी प्राप्त होती है। आइए, नेत्रदान का संकल्प लें और किसी के अंधकारमय जीवन में प्रकाश का कारण बनें।”

