
उत्तर मध्य सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति एवं मां सावित्री फाउंडेशन, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में छायावाद के महत्वपूर्ण कवि कुंवर चंद्रप्रकाश सिंह के काव्य ‘घनमाला’ का विमोचन एवं उन पर चर्चा आयोजित हुई|बकौल मुख्य अतिथि श्री अनिल शर्मा, उपाध्यक्ष केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल आगरा ने कुंवर चंद्रप्रकाश के काव्य को एक बड़ा फलक बताया| बतौर विशिष्ट अतिथि प्रो. विनय कुमार सिंह ने कहा की कुंवर चंद्रप्रकाश का काव्य उदात्तता का काव्य है | वे लोकजीवन सी जुड़ी लोकप्रवृत्ति के कवि हैं| कवि बड़ा कवि तभी कहा जा सकता है जब उसकी रचना प्रासंगिक हो|कुंवर चंद्रप्रकाश धरती की बात धरती के लोगों से कहते हैं| प्रो. शिवप्रकाश शुक्ल ने छायावाद की विकाश परंपरा के साथ कुंवर चंद्रप्रकाश के काव्य को जोड़कर देखा| प्रो. सत्यपाल शर्मा छायावाद के भारतीय और पाश्चात्य परंपरा के जुड़ाव और विकास प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण बात रखी| बतौर वक्ता प्रो. रामकठिन सिंह ने कहा कि कुंवर चंद्रप्रकाश छायावाद के उन्नायक कवि हैं|इनकी रचनाएं अपने विभिन्न आयामों से हमें संवेदित करती है|
