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उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज द्वारा हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत “कवि सम्मेलन” का हुआ आयोजन 

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज द्वारा हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत “कवि सम्मेलन” का हुआ आयोजन

बदलो- बदलो साथी हिंदी की तस्वीर को, समझो केरल कलकत्ता, समझो कश्मीर को।। प्रयागराज के वरिष्ठ कवि श्री यश मालवीय ने अपने अध्यक्षीय काव्य पाठ करते हुए हिंदी भाषा की चहुँओर स्वीकार्यता दर्शाते हुए आज कवि सम्मेलन में अपनी बात कही। समय था उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज द्वारा हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत “कवि सम्मेलन” का जिसमें प्रयागराज के साथ ही देश के जाने-माने कवियों एवं रचनाकारों का संगम सांस्कृतिक प्रेक्षागृह में हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत श्री यश मालवीय द्वारा महाकवि निराला द्वारा रचित सरस्वती वंदना से हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ दुर्ग से आए युवा कवि मयंक शर्मा ने अपने मुक्तक से रखी “कोई जब पूछता है संत कैसे होते हैं। तो कलम उठा कर मैं कलाम लिख देता हूं ।। जिसे दर्शकों ने तालियों से स्वागत किया। मयंक शर्मा ने अपने चिर परिचित रचना “बेटे ढूंढने में रहे कागज वसीयतों का का, बेटियां तो बाप की दवाई ढूंढती रही।।

मैनपुरी से आए श्री बलराम श्रीवास्तव ने अपने काव्य रचना में जीवन दर्शन देते हुए रचना कही कि “मिलाकर हां में हां जीवन जिया तो क्या जिया तुमने। किसी से छीन कर अमृत पिया तो क्या पिया तुमने”।।

युवा रचनाकार सुश्री वंदना शुक्ला ने अपने काव्य रचना में सभी को अपनी सुप्रसिद्ध रचना “मैं चाहती हूं प्रेम पाठ सब को पढ़ाना। इस वास्ते में प्रेम सबमे में बांट रही हूं, सुनाया।

मशहूर शायर और रचनाकार अज़हर इक़बाल की रचना “कहीं कि किसी के होने का एहसास होने लगता है। यह दर्द तो अब अनायास होने लगता है को दर्शकों ने तालियों से इस्तकबाल किया। उनकी अन्य रचनाओं में “दया अगर लिखने बैठो, होते हैं अनुवादित राम” को वहां उपस्थित सभी रचनाकारों और श्रोताओं ने खूब सराहा।
प्रभु श्रीराम पर इटावा से आए डॉ कमलेश शर्मा ने अपने काव्य को समर्पित किया
“राम अलौकिक युग नायक थे, दनुज दलन हित धनुसायक थे। राम चिन्ह जीवन दर्शन के, मूल स्रोत युग परिवर्तन के।।
प्रयागराज से वरिष्ठ कवि योगेंद्र मिश्रा ने अपनी काव्य रचना में कहा कि “समंदर की प्यास लिए नदी भागती है, तमाम ख्वाबों में एक नींद जागती है। को दर्शकों की खूब वाहवाही मिली। कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रसिद्ध कवि डॉ० श्लेष गौतम ने अपने काव्य उद्बबोधन में राजभाषा हिंदी को चरितार्थ किया। “स्वाधीनता के पृष्ठ है, इतिहास है हिंदी। गांधी की सतत आस्था, विश्वास है हिंदी।

कार्यक्रम के समापन पर केन्द्र निदेशक प्रो० सुरेश शर्मा ने आमंत्रित सभी रचनाकारों को आभार व उपस्थित सभी श्रोतागणों को धन्यवाद व्यक्त किया।

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