
लेले अइहा बालम शिल्प मेलवा से चुनरी, न ता तरसा देहब सेजरिया से अंगुरी
दीपावली शिल्प मेले में बुधवार की सुरमई शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें लोकगीत गायन, भजन, सुगम संगीत की प्रस्तुति कलाकारों के द्वारा शिल्प हाट के मुक्ताकाशी मंच पर किया गया। कार्यक्रम की शुरुवात प्रयागराज के लोकगीत गायक उदय चन्द्र परदेशी और उनके साथी कलाकारों ने हनुमत स्तुति कजरी से की इसके बाद उन्होंने ‘‘ लेले अइहा बालम शिल्प मेलवा से चुनरी ना त तरसा देहब हमहूं देखा देहव सेजरिया से अंगुरी एवं घर-घर जरी दीया देवरी के दिनवां प्रकाश पर्व आइल हो कातिक महिनवां गाकर श्रोताओं को खूब पसंद आया। संगीत के क्षेत्र में काफी नाम कमा चुकी लखनऊ से पधारी यामिनी पाण्डेय व कामिनी मिश्रा ने युगल में ‘‘ हमारे साथ रधुनाथ किस बात की चिंता एवं ऐसी मैं तो प्रेम दीवानी आज मेले में उड़ रही धूल मोहे प्यारी लागे भजन गाकर खूब तालियां बटोरी। वही तबला वादन नितिश हारमोनियम अंकित सिंह एवं पैड पर सक्षम श्रीवास्तव ने साथ दिया। कार्यक्रम की अगली कड़ी में प्रयागराज के विकास श्रीवास्तव ने ‘‘ सजा दो घर को गुलशन मेरे श्रीराम आए एवं फूलोें में तुम्हारा इशारा तो नहीं एवं श्रोताओं की मांग पर कई फिल्में गाने प्रस्तुत कर इस संगीत की निशा को आगे बढ़ाया। वहीं प्रयागराज की अवधी लोकगायिका मंजू नारायण ने सुभद्रा का सोहर ‘‘ मचिइह बैठइ हैं सासु ता बहुअर अरज करै कि सासु भौजी कै भये नंद लाल नैहर हम जाबे एवं सुन-सुन दुल्हा केस तोहर परिवार को गाकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। दयाराम कनौजिया और उनके सहयोगियों द्वारा कवन रंग मूंगवा कवन रंग मोतिया कवन हो रंगवा मां पर दुलर्भ धोबिया नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति से सभी का दिल जीत लिया। कार्यक्रम का संचालन शरद मिश्रा ने किया।
दिन-प्रतिदिन मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने एवं खरीददारी के जनमानस का सैलाब उमड़ रहा है। यहां राजस्थान, पंजाब, और बिहार के व्यंजनों की मिठास है तो बनारसी और चंदेरी साड़ियों की चमक है। क्राकरी, फर्नीचर, साजो-सामान और बच्चों के खिलौने भी प्रयागवासियों को खूब भा रहे हैं। मेले में आई राजस्थानी कच्ची घोड़ी का नृत्य लोगों के आकषर्ण का केंद्र है। इस मौके पर केंद्र निदेशक प्रो0 सुरेश शर्मा सहित अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
